अमर के पक्ष में खुलकर आईं जयाप्रदा

जयाप्रदा
Image caption जयाप्रदा रामपुर से पार्टी की सांसद हैं

समाजवादी पार्टी में विरोध के स्वर बढ़ते जा रहे हैं.

पूर्व पार्टी महासचिव अमर सिंह के बाद समाजवादी पार्टी की सांसद जयाप्रदा ने पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा है.

रामपुर की सांसद जयाप्रदा ने दिल्ली में पार्टी के चार विधायकों और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में पत्रकारों को संबोधित किया.

उन्होंने कहा कि अगर पार्टी के किसी सदस्य पर परिवार के लोग हमला कर रहे हैं तो उसको रोकना पार्टी नेतृत्व का काम है. उनका निशाना सीधे मुलायम सिंह यादव पर था, हाँ उन्होंने सीधे तौर पर उनका नाम नहीं लिया.

निशाना

फ़िल्मों से राजनीति का रुख़ करने वालीं जयाप्रदा ने कहा कि वह नेताजी से स्नेह करती हैं और वो उनके पिता समान हैं.

अगर मुझे मुलायम सिंह और अमर सिंह में से किसी एक को चुनना पड़े, तो मैं अमर सिंह को चुनूँगी क्योंकि अमर सिंह ने मुश्किल की घड़ी में मेरा साथ दिया है जयाप्रदा

लेकिन जब उनसे पूछा गया कि अगर ऐसा मौक़ा आया कि उन्हें मुलायम सिंह यादव और अमर सिंह के बीच एक को चुनना पड़ा तो वह किसको चुनेंगीं?

तो उनका जवाब था अमर सिंह को, जिन्होंने मुश्किल की घड़ी में उनका साथ दिया था. उन्होंनें इस बार रामपुर में हुए चुनाव का उदाहरण दिया जहाँ उनके निजी जीवन पर कीचड़ उछाला गया. जया प्रदा ने अमर सिंह के नेतृत्व में एक लोकमंच बनाने की घोषणा की. हालाँकि इसकी बात अमर सिंह गाज़ीपुर की एक रैली में शनिवार को ही कर चुके थे. उन्होंने कहा कि यह एक राजनीतिक मंच नहीं और यह मंच आम लोगों से जुड़े मामले अलग अलग स्तर पर उठाएगा.

प्रतिक्रिया

इधर समाजवादी पार्टी के महासचिव राम आसरे कुशवाहा ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अमर सिंह पार्टी के लिए इतिहास हैं और अब इसमें जयाप्रदा का नाम भी जोड़ दिया गया है.

Image caption अमर सिंह ने भी एक लोकमंच बनाने का ऐलान किया है

उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव और उनके परिवार के ख़िलाफ़ बोलना अनुशासनहीनता है और वह इस मामले की ख़बर नेताजी को देंगे. जानकारों का मानना है कि शायद मुलायम सिंह अमर सिंह को पार्टी से नहीं निकालेंगे क्योंकि अगर उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया तो राज्य सभा की उनकी सदस्यता बरक़रार रहेगी. माना जा रहा है कि अमर सिंह यही चाहते है. पार्टी में मौजूद अपने समर्थकों को आगे लाकर मुलायम सिंह पर प्रहार करवाने की घटना के बाद तो इस धारणा ने और ज़ोर पकड़ा है.

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