महाराष्ट्र पर 'भगवाधारी' विभाजित

  • 1 फरवरी 2010
गडकरी
Image caption गडकरी ने कहा कि भारत में कहीं भी काम कर सकता है भारतीय

महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों को निशाना बनाने को लेकर अब भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना आमने-सामने आ गए हैं.

दूसरी ओर एक दिन पहले उत्तर भारतीयों के समर्थन में आए संघ परिवार को शिवसेना ने आड़े हाथों लिया है और कहा है कि संघ मराठी अस्मिता के मामले में उपदेश न दे.

लेकिन सबसे कड़ा बयान आया है भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन गडकरी की ओर से. गडकरी ने कहा है कि सभी भारतीयों को देश में कहीं भी जाने और रहने का अधिकार है.

पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, "अलग-अलग भाषा और अलग-अलग वेश फिर भी एक देश. हम इसमें विश्वास करते हैं और यही हिंदुस्तान की ताक़त है. मैं नहीं मानता कि राज्य अस्मिता और राष्ट्रीय अस्मिता में कोई विरोध है."

निशाना

उन्होंने कहा कि भाषा, धर्म और क्षेत्र के आधार पर भेदभाव को पार्टी नहीं स्वीकार करती और न ही पार्टी ये मानती है कि इसे लेकर कोई विरोध भी है.

यह पूछे जाने पर कि शिवसेना तो भाजपा की सहयोगी पार्टी है, तो नितिन गडकरी का कहना था कि सभी पार्टियों का अपना अलग-अलग रुख़ है और सभी स्वतंत्र पार्टियाँ हैं.

रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों को निशाना बनाने की आलोचना करते हुए कहा था कि संघ भाषा के आधार पर भेदभाव का विरोध करता है.

Image caption उद्धव ठाकरे ने संघ को आड़े हाथों लिया

संघ के प्रवक्ता राम माधव ने कहा था कि संघ ने अपने स्वयंसेवकों से कहा है कि वे महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों की रक्षा करें.

इस पर शिवसेना ने कड़ी टिप्पणी की है. पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कहा कि संघ मराठी अस्मिता के मामले में दखल न दे.

पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, "संघ मुंबई के मामले में हमें नसीहत न दे. अगर संघ को हिंदी का प्रचार करना है, तो वह दक्षिण में जाकर करे."

उद्धव ठाकरे ने कहा कि मुंबई मराठी मानुष की है.

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