अमर और जयाप्रदा पार्टी से निष्कासित

अमर सिंह
Image caption अमर सिंह को अनुशासनहीनता का दोषी ठहराया गया है

समाजवादी पार्टी ने अमर सिंह और जयाप्रदा को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित करने और चार अन्य विधायकों को निलंबित किए जाने की घोषणा की है.

पार्टी महासचिव मोहन सिंह ने लखनऊ में पत्रकारों को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इन दोनों नेताओं को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का दोषी पाया गया है और इसलिए यह फ़ैसला किया गया है.

अमर सिंह ने लखनऊ में हुई इस घोषणा के तुरंत बाद दिल्ली में मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि वे मुलायम सिंह के आभारी हैं कि उन्हें पार्टी से निकाल दिया और अपनी मर्ज़ी से काम करने का अवसर दे दिया.

उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफ़ा देने से इनकार करते हुए कहा, "राज्यसभा की सीट मुझे भीख में नहीं मिली बल्कि मैंने उसे अर्जित किया है."

अमर सिंह ने फिलहाल किसी राजनीतिक पार्टी से जु़डने या कोई राजनीतिक दल बनाने की संभावना से इनकार किया है.

हमले

जयाप्रदा ने दिल्ली में पार्टी के चार विधायकों और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में पत्रकारों को संबोधित किया था और कहा था कि अगर पार्टी के किसी सदस्य पर परिवार के लोग हमला कर रहे हैं तो उसको रोकना पार्टी नेतृत्व का काम है.

अमर सिंह को पार्टी से बर्ख़ास्त किए जाने की मांग पिछले कुछ समय से उठ रही है. पार्टी के वरिष्ठ नेता अंबिका चौधरी और रामकृपाल यादव सहित कुछ अन्य नेता इस मामले में काफ़ी मुखर रहे हैं.

कुछ समय पूर्व अमर सिंह ने महासचिव समेत पार्टी के तीन पदों से यह कहते हुए इस्तीफ़ा दे दिया था कि अब वो अपने स्वास्थ्य का ख़्याल रखना चाहते हैं.

लेकिन हाल ही में एक निजी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में अमर सिंह समाजवादी पार्टी की कट्टर विरोधी मायावती के पक्ष में खुल कर सामने आए और उन्होंने कहा कि मायावती ने विषम परिस्थितियों में भी अपने को साबित किया है.

उन्होंने कहा कि वे मायावती का दर्द समझ सकते हैं, जब मुलायम सिंह यादव ने उन्हें 'अपमानित' किया था.

उनके इस तरह के बयानों के बाद लगने लगा था कि पार्टी इसे अनुशासनहीनता मानते हुए गंभीरता से लेगी और उनके ख़िलाफ़ कोई न कोई क़दम उठाया जाएगा.

'आभारी हूँ'

दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए अमर सिंह ने कहा, "मैं मुलायम सिंह के ख़िलाफ़ कुछ भी नहीं कहूँगा क्योंकि मैं अभी भी उनकी इज़्ज़त करता हूँ."

पार्टी से निकाले जाने के सवाल पर उन्होंने कहा, "पार्टी से निकाला जाना मेरे लिए आशीर्वाद की तरह है. मुझे पार्टी से निकाल कर उन्होंने मुझे अपनी मर्ज़ी का काम करने के लिए स्वतंत्र कर दिया है."

आगे की रणनीति के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि फ़िलहाल उन्होंने राजनीति के बारे में उन्होंने कोई विचार नहीं किया है और वे लोक मंच के माध्यम से काम करते रहेंगे.

राज्यसभा से इस्तीफ़ा देने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा, "मुझे राज्यसभा की सीट भीख में नहीं मिली है. मैंने इसे अर्जित किया है. मैं विधायकों के वोट से चुना गया हूँ और विधायक मुलायम सिंह और मेरी फ़ोटो लगे पोस्टरों के दम पर जीत के आए हैं."

समाजवादी पार्टी के पूर्व महासचिव ने कहा कि उन्होंने पार्टी की 14 साल तक सेवा की और बदले में पार्टी पदाधिकारियों और मुलायम सिंह के परिवार के लोगों ने उन्हें 'कमीना, पागल और बेशर्म' कहा.

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