विफल नसबंदी ने रास्ता रोका

राजस्थान (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption राजस्थान में इन दिनों पंचायत चुनावों का अंतिम चरण चल रहा है

राजस्थान में अदालत ने एक ग्रामीण की इस दलील को मंजूर नहीं किया कि नसबंदी ऑपरेशन विफल होने से हुई तीसरी संतान के कारण उसे सरपंच का चुनाव लड़ने से न रोका जाए.

उसका तर्क था कि इसमें उसका कोई दोष नहीं है.

लेकिन अदालत ने कहा पंचायत क़ानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है और उसकी याचिका ख़ारिज कर दी.

अदालत के इस फ़ैसले के बाद जयपुर ज़िले के गजानंद के सरपंच बनने के मंसूबों पर पानी फिर गया.

राजस्थान के पंचायत क़ानून के तहत दो से अधिक संतान होने पर कोई व्यक्ति चुनाव लड़ने का हक़दार नहीं रह जाता.

गजानंद ने अदालत को बताया कि उसकी पत्नी ने एक सरकारी अस्पताल में नसबंदी का ऑपरेशन कराया था लेकिन इसके बाद भी एक संतान और पैदा हो गई.

उसकी दलील थी कि इसमें उनका कोई कसूर नहीं है.

गजानंद कहना था कि ये अलग तरह का मामला है लिहाज़ा उसके चुनाव लड़ने के ख्वाबों को तोड़ा नहीं जाना चाहिए.

गजानंद के वकील धर्मवीर ठोलिया ने बीबीसी से कहा, "हमने अदालत से यही गुहार की थी कि इसमें दंपति का कोई कसूर नहीं है, तीसरी संतान उन्हें बिना चाहे मिली और वो भी डॉक्टरों की ग़लती से, मगर अदलत ने ये दलील स्वीकार नहीं की."

अब इन नियमों के चलते गजानंद कभी सरपंच नहीं बन पाएगा.

लेकिन वो चाहे तो लोकतंत्र के संसद और विधानसभा जैसे ऊँचे प्रतिष्ठानों का सदस्य जरूर बन सकता है, जिन्होंने ऐसे क़ानून का निर्माण किया था.

राजस्थान में वर्ष 1995 में ये क़ानून लागू है.

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