तेलंगाना के समर्थन में जमात की रैली

तेलंगाना
Image caption हजारों मुस्लिम महिलाओं ने तेलंगाना के समर्थन में प्रदर्शन किया

भारत में मुसलमानों की सबसे बड़ी सामाजिक-धार्मिक संगठन मानी जाने वाली जमाते इस्लामी हिंद ने तेलंगाना राज्य की मांग के पक्ष में "तेलंगाना गर्जना" रैली का आयोजन किया.

इस विशाल रैली में पूरे तेलंगाना क्षेत्र से पचास हज़ार पुरुषों, महिलाओं और छात्रों ने भाग लिया. रैली को सत्तारूढ़ कांग्रेस, मुख्य विपक्षी दल तेलुगु देशम, तेलंगाना राष्ट्र समीति के कई बड़े नेताओं ने संबोधित किया.

जमात-ए-इस्लामी ने इस रैली में एक "तेलंगाना घोषणा पत्र" जारी करके यह स्पष्ट किया की वह तेलंगाना को एक आम राज्य जैसे नहीं बल्कि एक मॉडल राज्य के रूप में देखना चाहती है जहाँ सब को न्याय मिले और सभी के साथ बराबरी का बर्ताव किया जाए.

तेलंगाना आंदोलन की कमान सँभालने वाले तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर राव समेत सभी नेताओं ने इस विशाल जनसभा में स्वीकार किया की तेलंगाना क्षेत्र में गत पचास वर्षों से सबसे ज्यादा उपेक्षा और नाइंसाफ़ी मुस्लिम समुदाय के साथ हुई है.

Image caption चंद्रशेखर राव ने रैली को जमात के नेताओं के साथ संबोधित किया.

चंद्रशेखर राव का कहना था कि जब तेलंगाना को आंध्र प्रदेश में मिलाकर आंध्र प्रदेश की स्थापना हुई थी तब सरकारी नौकरियों में मुसलमानों की भागीदारी 36 फ़ीसदी थी जो अब घट कर एक प्रतिशत से भी कम रह गई.

हालांकि चंद्रशेखर राव ने ये वादा भी किया है कि नए तेलंगाना राज्य की राजनीतिक संस्थाओं और सरकारी नौकरियों में मुसलमानों को उनकी जनसंख्या के हिसाब से हिस्सा दिया जाएगा. उनका कहना था कि तेलंगाना में मुसलमानों की जनसंख्या 12 से 15 प्रतिशत है उन्हें नौकरियों, विधान सभा सहित सभी राजनीतिक संस्थानों और बजट में भी उतना ही हिस्सा मिलना चाहिए.

'तेलंगाना आंदोलन अंतिम चरण में'

इस विशाल जनसभा में हिस्सा लेने वाले कांग्रेस कार्यकारिणी के सदस्य जी वेंकटस्वामी का मत था कि तेलंगाना आंदोलन अब अपने अंतिम चरण में पहुँच गया है और अब जब बुर्का पहनने वाली हज़ारों मुस्लिम महिलाएँ भी इसके समर्थन में बाहर निकल आई हैं तब इसके गठन को कोई भी रोक नहीं सकता.

जमात की आंध्र प्रदेश शाखा के अध्यक्ष मालिक मोअतसिम का कहना था की जमात इस आंदोलन के साथ इसलिए जुडी है क्योंकि उसका मानना है कि यह लड़ाई बराबरी के अधिकार के लिए है. उनका कहना था कि तेलंगाना राज्य के लिए लड़ने वाली जमात ज़रुरत पड़ने पर नए राज्य में नाइंसाफी और शोषण के खिलाफ़ भी लड़ेगी.

जमात कि यह रैली इस परिपेक्ष में ज्यादा महत्त्वपूर्ण थी क्योंकि अनेक राजनीतिक दल और नेता दावे कर रहे थे कि मुसलमान अलग तेलंगाना राज्य के पक्ष में नहीं हैं.

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