कांग्रेस आई महंगाई लाई: गडकरी

नितनि गडकरी
Image caption भाजपा अध्यक्ष के मुताबिक महंगाई के लिए सटोरिए ज़िम्मेदार हैं

भारतीय जनता पार्टी के हाल में ही अध्यक्ष बने नितिन गडकरी ने महंगाई को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया है और सीधे-सीधे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कृषि मंत्री शरद पवार को ज़िम्मेदार ठहराया है.

उन्होंने कहा कि जब भी कांग्रेस की सरकार आती है, तब महंगाई ज़ोर पकड़ती है.

दिल्ली के कांस्टिट्यूशनल क्लब पहुँचे नितिन गडकरी आंकड़ों से लैस थे. क़रीब एक घंटे चले उनके भाषण से पहले पत्रकारों को 'महंगाई का महाघोटाला' नाम से पावरप्वाईंट प्रज़ेंटेशन की कॉपी बांटी गई.

क़रीब 20 पन्नों में समझाने की कोशिश की गई थी कि जब भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का शासन था तब दाम कम थे, लेकिन जब भी कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में आती है, आंटा, चावल, सब्ज़ी, चीनी, दाल, तेल जैसे चीज़ों के दामों में बढ़ोत्तरी हो जाती है.

जैसे वर्ष 2004 में गेहूँ के दाम नौ रुपए किलो थे, जो अब बढ़कर 24 रुपए किलो तक पहुँच गए हैं.

मूंग की दाल की क़ीमत 24 रुपए से बढ़कर 100 रुपए हो गई है, दूध के दाम 14 रुपए से बढ़कर 30 रुपए पहुँच गए हैं और भी बहुत कुछ. इसके अलावा पत्रकारों को 50 पन्नों का आंकड़ो से लबालब भरा पन्नों का जत्था अलग से दिया गया.

कई पत्रकारों का कहना था कि इन आंकडो को जुटाने में ख़ासी मेहनत की गई है.

सटोरिए ज़िम्मेदार

बहरहाल भाजपा अध्यक्ष के मुताबिक़ महंगाई के लिए सटोरिए ज़िम्मेदार हैं और किसान को अपने उत्पाद का सही दाम नहीं मिल पा रहा है. उन्होंने कहा कि दामों के ऊपर जाने का फ़ायदा कमोडटी एक्सचेंज को मिला है.

उन्होंने कहा कि हल्दी की कुल बिक्री 1,32,72060 टन दिखलाई कई लेकिन मात्र 3,880 टन हल्दी का वितरण किया गया.

नितिन गडकरी का कहना था कि इस मामले में सट्टेबाज़ी का प्रतिशत 99.97 प्रतिशत था और दूसरी तरफ़ हल्दी के दाम 38 रुपए से बढ़कर 130 रुपए प्रति किलो तक जा पहुँचे.

उन्होंने कहा, "सब आँटा वाले, चीनी वाले, चीनी का निर्यात करने वाले, इनके (कंपनियों) शेयर का दाम इतना बढ़ा है, आप इसका सर्वे कर लीजिए."

नितिन गडकरी ने महंगाई पर आंदोलन शुरू करने की बात कही और सरकार की आर्थिक नीतियों को ज़िम्मेदार ठहराया. उन्होंने प्रधानमंत्री पर हमला बोला और साथ ही कृषि मंत्री शरद पवार को भी आड़े हाथों लिया.

उन्होंने कहा, "मैने बहुत बार ये बात स्पष्ट कही कि शरद पवार इसके लिए निश्चित तौर पर ज़िम्मेदार हैं. अगर इससे किसी को फ़ायदा मिले, तो ये प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री का फर्ज़ है कि वो ये पता लगाएँ कि किन लोगों को इससे फ़ायदा हुआ है. शरद पवार कैबिनेट के सदस्य हैं और इनमें बहुत से फ़ैसले कैबिनेट ने अनुमोदित किए हैं. वित्त मंत्री, वाणिज्य मंत्री और खाद्य और आपूर्ति मंत्री, इनमें समन्वय नहीं है और ये बहुत से निर्णय तीन मंत्रियों से जुड़े हुए हैं."

आम आदमी से जुड़े मुद्दों की तलाश में भटक रही भाजपा के लिए महंगाई का मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण है और पार्टी का कहना है कि बजट सत्र में सरकार को इस मुद्दे पर घेरा जाएगा.

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