बीटी बैंगन फ़िलहाल नहीं

बैंगन
Image caption अनुवांशिक रुप से परिष्कृत बैंगन पर अब अध्ययन करवाएगी सरकार

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा है कि बीटी बैंगन पर वैज्ञानिक अध्ययन होने और सर्वसम्मति बनने तक सरकार इसके व्यावसायिक उत्पादन पर रोक लगा रही है.

उन्होंने कहा है कि वैज्ञानिक समुदाय बीटी बैंगन के ख़िलाफ़ है, राज्य सरकारें इसका विरोध कर रही है और ज़िम्मेदार नागरिक समुदाय इसके पक्ष में नहीं हैं इसलिए एक उत्तरदायी सरकार की तरह इस पर फ़िलहाल रोक लगाने का फ़ैसला किया गया है.

उल्लेखनीय है कि आनुवंशिक रुप से संवर्धित इस बैंगन के ख़िलाफ़ कई राज्यों में व्यापक प्रदर्शन हुए थे.

इसका विरोध करने वालों का कहना है कि यह मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए हानिकारक है.

रोक

जयराम रमेश ने मंगलवार को मीडिया से कहा कि चूंकि बीटी बैंगन को लेकर फ़िलहाल पर्याप्त वैज्ञानिक अध्यययन नहीं हुए हैं और इस समय बीटी बैंगन के व्यावसायिक अध्ययन के लिए जल्दबाज़ी की कोई वजह भी नहीं है इसलिए फ़िलहाल इसे अनुमति नहीं दी जा रही है.

उन्होंने कहा, "भारत दुनिया का पहला देश होता जो बीटी बैंगन के व्यावसायिक उत्पादन की अनुमति देता इसलिए इस पर बहुत एहतियात की ज़रुरत थी."

पर्यावरण मंत्री ने कहा है, "जब तक स्वतंत्र वैज्ञानिक अध्ययन से यह साबित नहीं होता कि यह स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए हानिकारक नहीं है तब तक यह रोक जारी रहेगी."

उन्होंने कहा कि इस पर कई समूहों को अध्ययन करने के लिए कहा जा रहा है.

जयराम रमेश ने बीटी बैंगन पर रोक लगाने का फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि इस पर रोक तत्काल लागू हो गई है और जब तक इसके व्यावसायिक उत्पादन को लेकर सर्वसम्मति नहीं बनती है इसे हटाया नहीं जाएगा.

Image caption जयराम रमेश ने इस फ़ैसले से पहले सभी पक्षों से चर्चा की है

सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, "मुझ पर दबाव में आने का आरोप लगाया जा सकता है लेकिन यह सोच समझकर, ज़िम्मेदारी के साथ लिया गया पारदर्शी निर्णय है."

उल्लेखनीय है कि इस निर्णय पर पहुँचने से पहले जयराम रमेश ने सात दौर की चर्चाएँ की हैं और जैसा कि उन्होंने बताया, उन्होंने विख्यात कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामिनाथन से भी तीन दौर की चर्चा की.

जयराम रमेश ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान निर्णय सिर्फ़ उस बीटी बैंगन के लिए जिसे मॉनसेंटो के साथ मिलकर माहिको ने विकसित किया है.

बीटी बैंगन के बाद बहुत सी और सब्ज़ियाँ व्यावसायिक उत्पादन के लिए अनुमति का इंतज़ार कर रही है.

इसका समर्थन करने वाले लोगों का कहना है कि इससे उत्पादन तो बढ़ेगा ही साथ ही किसानों की कीटनाशकों पर निर्भरता भी कम होगी.

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