भारत को अनिश्चित समय तक मौक़े नहीं: ईरान

  • 9 फरवरी 2010
पाइप लाइन (फ़ाइल फो़टो)
Image caption गैस पाइप लाइन पर भारत और ईरान के बीच 15 सालों से बातचीत जारी है

ईरान का कहना है कि ईरान-पाक-भारत गैस पाइप लाइन परियोजना पर भारत से बातचीत ख़त्म नहीं हुई है. ईरान ने कहा है कि गेंद भारत के पाले में है, भारत को अनेक मौक़े दिए गए हैं लेकिन अनिश्चित समय तक नहीं दिए जा सकते हैं.

भारत में ईरान के राजदूत मेहदी नबीज़ादह का कहना है कि गैस पाइप लाइन परियोजना पर उनकी बातचीत पाकिस्तान से आगे बढ़ रही है और वो आख़िरी दौर में है. उनका कहना है कि जहाँ तक भारत का सवाल है, ये भारत पर निर्भर करता है कि वो इस परियोजना का हिस्सा बने.

मेहदी नबीज़ादह ने ये बातें मंगलवार को ईरान में इस्लामी क्रांति की 31वीं सालगिरह के उपलक्ष्य में दिल्ली में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में कही है.

ईरान-पाक-भारत गैस पाइप लाइन पर मेहदी नबीज़ादह ने कहा, "हम हमेशा कोशिश करते रहे हैं कि भारत, पाकिस्तान और ईरान के बीच पाइप लाइन परियोजना की शुरुआत हो. भारत के लिए दरवाज़े खुले हैं और भारत को हमेशा अवसर दिए गए हैं. लेकिन अनिश्चित समय तक नहीं दिए जा सकते हैं. भारत को भी क़दम बढ़ाने चाहिए."

नबीज़ादह का कहना था कि उनकी बातचीत पाकिस्तान से जारी है और वो कार्यान्वयन के स्तर पर है.

इस अवसर पर भारत और ईरान के अच्छे रिश्तों पर भी उन्होंने चर्चा की और कहा कि दोनों देशों के बीच इस समय व्यापार 12 अरब डॉलर के क़रीब है.

तालेबान, तालेबान ही हैं

उन्होंने अफ़ग़निस्तान की मौजूदा स्थिति पर भी टिप्पणी की और कहा है कि जिन उद्देश्यों को लेकर पश्चिमी देशों की सेना पिछले नौ सालों से वहाँ है, वो पूरा होता नहीं दिख रहा है.

उनका कहना था, "पश्चिमी सेना तीन उद्देश्यों- मादक पदार्थों पर रोक लगाने, चरमपंथ पर क़ाबू पाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आई थी, लेकिन इसे आज भी पूरा नहीं किया जा सका है."

नबीज़ादह ने कहा, "मैं समझता हूँ कि अगर अफ़ग़ानिस्तान में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किसी दूसरे देश की मदद की ज़रूरत है तो पड़ोसी देश सहायता कर सकते हैं और वो अधिक रचनात्कमक भूमिका निभा सकते हैं."

नबीज़ादह के अनुसार इसमें भारत, पाकिस्तान और ईरान अहम भूमिका निभा सकते हैं क्योंकि इन देशों के बीच अच्छे रिश्ते हैं.

पश्चिमी देशों के तालेबान को मुख्यधारा में लाने की रणनीति, जिसके अंतर्गत 'अच्छे तालेबान' और 'बुरे तालेबान' में फ़र्क़ करने की बात कही गई है. उस मुद्दे पर नबीज़ादह का कहना था कि तालेबान, तालेबान हैं और इसमें कोई गुड और बैड नहीं है.

भारत-पाकिस्तान के बीच संभावित द्वीपक्षीय बातचीत पर उनका कहना था कि ईरान हमेशा इस तरह के संवाद का स्वागत करता है और दोनों देशों के बीच सीधा संवाद तेज़ी के साथ कामयाब होना चाहिए.

इस अवसर पर नबीज़ादह ने अनेक क्षेत्रों में ईरान की कामयाबी को मीडिया के सामने रखा और कहा कि ईरान ने इस्लामी क्रांति के बाद काफ़ी तरक़्की की है हालाँकि उसका पहले दस साल जंग में बीत गए और अगले दल साल आर्थिक प्रतिबंधों में गुज़रे है.

नबीज़ादह ने फ़ारस की खाड़ी में पश्चिमी देशों की सेना की मौजूदगी पर भी चिंता ज़ाहिर की.

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