चरमपंथी लौटें तो स्वागत: चिदंबरम

  • 11 फरवरी 2010
पी चिदंबरम
Image caption चिदंबरम ने कहा है कि योजना बनाने से पहले जम्मू कश्मीर में सभी वर्गों से चर्चा की जाएगी

भारत सरकार ने कहा है कि यदि 'पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर' में चले गए लोग चरमपंथ छोड़कर वापस लौटते हैं तो इसका स्वागत है.

जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भारत प्रशासित कश्मीर से 90 के दशक में नियंत्रण रेखा पार करके पाक प्रशासित कश्मीर में चले गए कश्मीरियों के लिए 'आत्मसमर्पण की नीति' का प्रस्ताव रखा है.

इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा, "कोई भी भारतीय जो पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में चला गया हो और वापस लौटना चाहता हो, तो इसका स्वागत है."

केंद्र सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर पहली बार प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए गृहमंत्री ने स्वीकार किया कि यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को मंज़ूर है. उन्होंने कहा, "यह विचार हमें मंजूर है...अब इसे एक योजना के रुप में अमलीजामा पहनाना है."

इससे पहले जब उमर अब्दुल्ला ने आत्मसमर्पण नीति का प्रस्ताव रखा था तो जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसका विरोध किया था.

जवाब में उमर अब्दुल्ला ने अपने इस प्रस्ताव का बचाव किया था.

यह प्रस्ताव उन्होंने छह फ़रवरी को दिल्ली में आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे पर हुई मुख्यमंत्रियों की बैठक में रखा था.

स्वागत

आर्थिक मामलों पर मंत्रिमंडल की समिति में लिए गए फ़ैसलों की जानकारी देते हुए एक सवाल के जवाब में पी चिदंबरम ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार उन्होंने 'पाक अधिकृत कश्मीर को भारत का हिस्सा' बताते हुए कहा कि 'कुछ कारणों' से नियंत्रण रेखा के पार चले गए लोग अगर लौटना चाहते हैं तो 'सरकार को लौटने की सुविधा' मुहैया करवानी चाहिए.

Image caption उमर अब्दुल्ला के प्रस्ताव का ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कड़ा विरोध किया था

उन्होंने कहा कि लौटने वाले लोगों के लिए जो योजना बनाई जाएगी उसमें लौटने वाले लोगों की पहचान की जाएगी, छानबीन की जाएगी, उनको डिब्रीफ़ किया जाएगा और पुनर्वास के ज़रिए उनका समाज में एकीकरण किया जाएगा.

चिदंबरम ने कहा, "हम इसके लिए जम्मू कश्मीर में सभी वर्ग के लोगों से बात करेंगे."

उनका कहना था कि जम्मू कश्मीर में सत्तारुढ़ गठबंधन में भी दो पार्टियाँ नेशनल कॉन्फ़्रेंस और कांग्रेस हैं. उन्होंने कहा कि इस बारे में विपक्षी दल से भी चर्चा की जाएगी.

माना जाता है कि 1989 के बाद से हज़ारों कश्मीरी युवक नियंत्रण रेखा के पार चले गए थे.

इनमें से कुछ लोग तो वापस लौट आए थे लेकिन बहुत से लोग अभी भी वापस लौटना चाहते हैं.

एजेंसी का कहना है कि कोई 800 युवकों ने अलग-अलग चैनलों के ज़रिए भारत प्रशासित कश्मीर में वापस लौटने की इच्छा जताई है.

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