तेलंगाना: राजनीतिक दल नाराज़

तेलंगाना के लिए आंदोलन के दौरान तोड़फोड़ (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption तेलंगाना राज्य की माँग को लेकर आंदोलन कई बार हिंसक मोड़ ले चुका है

आंध्र प्रदेश में अलग तेलंगाना राज्य का आंदोलन चलने वाले राजनैतिक दलों और अन्य संगठनों ने श्रीकृष्णा समिति के कामकाज के दायरे पर नाराज़गी जताई है.

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को ही समिति के कामकाज के दायरे की घोषणा की है.

इसके अनुसार पाँच सदस्यों वाली इस समिति से कहा गया है कि पृथक तेलंगाना राज्य की मांग के साथ-साथ संयुक्त आंध्र प्रदेश की मांग का भी जायज़ा ले और दोनों ही मांगों पर सभी राजनैतिक दलों और अन्य संगठनों से बातचीत करे.

समिति को काम पूरा करने के लिए 31 दिसंबर, 2010 तक का समय दिया गया है.

नाराज़गी

अलग राज्य का आंदोलन चलने वाली तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने श्रीकृष्णा समिति के कामकाज के दायरे पर कड़ी नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा है कि यह तेलंगाना की जनता को धोखा देने की एक और कोशिश है.

टीआरएस के अध्यक्ष और लोकसभा सदस्य के चन्द्रशेखर राव ने कहा, "पृथक राज्य और संयुक्त आंध्र प्रदेश दोनों मांगों पर विचार की बात इस बात का प्रमाण है कि केंद्र सरकार तेलंगाना की जनता को धोखा देना चाहती है और हम इसे स्वीकार नहीं कर सकते."

उन्होंने कहा, "हद यह है कि इस घोषणा में सरकार ने तेलंगाना शब्द का भी उपयोग नहीं किया है."

कांग्रेस के सांसदों के फ़ोरम के संयोजक पोन्नम प्रभाकर ने भी समिति के कामकाज के दायरे की आलोचना की है और कहा है कि आंध्र क्षेत्र के लोगों की राय लेने की कोई आवश्कता ही नहीं है क्योंकि वो पहले ही यह कह चुके हैं कि वो संयुक्त आंध्र प्रदेश चाहते हैं जब कि तेलंगाना के लोग अलग राज्य चाहते हैं.

उन्होंने कहा कि श्रीकृष्णा समिति से यह कहना ठीक नहीं है कि वो राज्य विभिन्न क्षेत्रों में हुए विकास का भी आकलन करे.

पोन्नम प्रभाकर का कहना था, "विकास एक अलग चीज़ है और भावना अलग." इधर सर्वदलीय तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति की एक बैठक बुलाई गई है जिसमें समिति के कामकाज के दायरे पर विचार क्या जाएगा.

कई जन संगठनों के नेताओं ने भी इस पर असंतोष व्यक्त किया है.

संयुक्त संघर्ष समिति के सदस्य पी यादगिरी ने कहा कि यह स्वीकार्य नहीं है क्योंकि उनका उद्देश तेलंगाना की मांग को ठंडे बस्ते में डालना है.

तेलगुदेशम विभाजित

इस विषय पर मुख्य विपक्षी दल तेलुगु देशम बँटा हुआ है.

जहाँ तेलंगाना से संबंध रखने वाले एक वरिष्ठ विधायक ई दयाकर राव ने समिति के कामकाज के दायरे को खारिज कर दिया है और कहा है कि इससे तेलंगना राज्य नहीं बन सकता.

वहीं इस पार्टी के रायल सीमा प्रांत के विधायक पी केशव ने कहा कि समिति को दिया गया दस महीने का समय नाकाफ़ी है.

उन्होंने कहा, "इस समय लोग बहुत उत्तेजित हैं और वो अच्छा-बुरा सोचे बिना अपनी राय दे देंगे. समिति अपना काम उस समय शुरु करे जब लोगों की भावनाएँ ठंडी हो जाएँ."

कामकाज का दायरा

भारत सरकार ने पृथक तेलंगाना राज्य के मुद्दे का समाधान ढूंढने के लिए तीन फ़रवरी को गठित न्यायधीश बीएन श्रीकृष्णा समिति के कामकाज का दायरा और शर्तें निर्धारित कर दी हैं.

Image caption चंद्रशेखर राव के लंबे अनशन के बाद केंद्र सरकार ने राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरु करने की घोषणा की लेकिन बाद में पीछे हट गई

समिति को कहा गया है कि वह आंध्र प्रदेश में पृथक राज्य को लेकर समर्थन के अलावा संयुक्त आंध्र प्रदेश की मांग पर भी लोगों की राय जाने.

इसके तहत समिति पृथक तेलंगाना राज्य की मांग और आंध्र प्रदेश को अविभाजित रखने की मांग को लेकर आंध्र प्रदेश की स्थिति का आकलन करेगी.

साथ ही समित यह भी देखेगी कि आंध्र प्रदेश राज्य के गठन के बाद से वहां कितनी तरक्की हुई है और उसका क्षेत्र के विभिन्न इलाक़ों पर कितना असर पड़ा है. इस असर को समझने के लिए समिति राज्य के समाज के विभिन्न तबकों, महिलाओं बच्चों, छात्रों, अल्पसंख्यकों और पिछड़ा वर्ग के लोगों से बात करेगी.

इसी संदर्भ में समिति उन समस्याओं की निशानदेही करेगी जिनका समाधान आवश्यक है.

तेलंगाना के मुद्दे पर न्यायधीश श्रीकृष्णा समिति विभिन्न दलों के राजनेताओं, उद्योगपतियों, श्रम संघों, कृषक संघों, महिला संगठनों, और छात्र संगठनों से सलाह मशवरा करेगी ताकि राज्य के सभी तबकों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे क्या कदम उठाए जाएँ यह तय किया जा सके.

न्यायधीश श्रीकृष्णा समिति को अपनी रिपोर्ट 31 दिसंबर 2010 तक सरकार को सौंपनी है.

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