गुप्तचर व्यवस्था विफल नहीं रही: चिदंबरम

  • 14 फरवरी 2010
पुणे धमाका
Image caption माना जा रहा है कि पुणे में विदेशी नागरिकों को निशाना बनया गया

महाराष्ट्र के पुणे शहर में हुए धमाके के बाद रविवार को गृह मंत्री पी चिदंबरम ने घटनास्थल का दौरा किया. गृह मंत्री चिदंबरम घायलों को देखने पुणे के ससून अस्पताल गए.

उन्होंने बताया कि धमाके की जाँच एटीएस को सौंप दी गई है.

पी चिदंबरम ने पत्रकारों से बातचीत में इन ख़बरों का खंडन किया कि गुप्तचर व्यवस्था विफल रही है. उनका कहना था कि सुरक्षा एजेंसियाँ इस मामले को जल्द सुलझा लेंगी.

गृह मंत्री का कहना था कि पुणे का कोरेगांव पहले से ही चरमपंथियों के निशाने पर था. मुंबई हमले के सिलसिले में गिरफ़्तार पाकिस्तानी मूल के अमरीकी नागरिक डेविड हेडली 2008 में यहाँ रह चुके हैं.

उनका कहना था,''ओशो आश्रम और चबाद हाउस हार्ड टार्गेट थे जबकि कैफे़ आदि सॉफ्ट टार्गेट थे.''

चिदंबरम का कहना था कि इसमें विदेशी और भारतीय लोगों को निशाना बनाया गया और ऐसी सूचनाएँ हैं कि बम बैक पैक में रखा गया था.

चिदंबरम ने कहा कि जो स्थान आसान निशाने बन सकते हैं, उन पर और सतर्कता बरतने की ज़रूरत है.

उन्होंने बताया कि जाँच आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) को सौंप दी गई है और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी उनकी मदद कर रही है. साथ ही पुणे और दिल्ली के फ़ोरेंसिंक विशेषज्ञ जाँच कर रहे हैं.

चिदंबरम ने जानकारी दी कि पुणे शहर में हुए धमाके में नौ लोग मारे गए हैं और 57 लोग घायल हुए हैं जिन्हें विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. इनमें से एक की हालत की गंभीर है.

उन्होंने बताया कि 38 लोग अस्पताल में भर्ती हैं और 19 लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है.

चिदंबरम ने कहा,''ये दुखद घटना है और मेरा अनुरोध है कि मीडिया को अटकलें लगाने से परहेज़ करना चाहिए. आपसे अनुरोध हैं कि जो आधिकारिक तौर पर बताया जा रहा है, उसी पर भरोसा करें."

इसके पहले चिदंबरम ने तमिलनाडु में मीडिया से बातचीत में कहा था,'' पिछले 14 महीनों में ये गंभीर आतंकवादी हमला है. मैं सबसे शांति बनाए रखने की अपील करता हूँ."

हाई अलर्ट

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पूरे देश में हाई अलर्ट जारी कर दिया है और लोगों से अपील की है.

महाराष्ट्र सरकार ने भी रेल स्टेशनों और हवाई अड्डों पर हाई अलर्ट की घोषणा की है.

धमाका पुणे के लोकप्रिय रेस्तरां जर्मन बेकरी में शाम सात बजे के आसपास हुआ.

उस समय वहाँ बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे जिनमें विदेशी नागरिक भी थे.

प्रशासन ने एक विदेशी नागरिक के मारे जाने और एक के घायल होने की बात कही है, वहीं ये भी कहा है कि कुछ और मृतकों की नागरिकता सुनिश्चित करने के प्रयास हो रहे हैं.

ग़ौरतलब है कि ये हमला उस समय हुआ है जब भारत और पाकिस्तान ने 25 फ़रवरी को विदेश सचिव स्तर की बातचीत करने बात कही है.

भारत ने इससे पहले नवंबर, 2008 को मुंबई पर हुए चरमपंथी हमलों के लिए पाकिस्तान में मौजूद तत्वों को दोषी ठहराया था.

उधर पाकिस्तान ने कहा था कि चरमपंथी ताकतें भारत-पाकिस्तान के अच्छे संबंध नहीं चाहतीं और इसीलिए दोनों देशों के बीच मतभेद पैदा करने के लिए ऐसी घटनाएँ हो रही है.

केंद्रीय गृह सचिव जीके पिल्लै ने मीडिया को बताया कि धमाका तब हुआ जब जर्मन बेकरी में लावारिस पड़े एक बैग को एक वेटर ने खोलने का प्रयास किया.

'निशाने पर विदेशी'

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बड़े धमाके की आवाज़ सुनी गई जिससे जर्मन बेकरी का साइन-बोर्ड और शीशे टूट गए और दीवार में एक बड़ा छेद हो गया.

एक घायल प्रत्यक्षदर्शी संतोष का कहना था, "मैंने ऊँची आवाज़ सुनी और धरती कांप गई. फिर मुझे कुछ पता नहीं कि क्या हुआ."

महत्वपू्र्ण है कि इस बेकरी-रेस्तरा के पास ही ओशो आश्रम और यहूदी केंद्र- चबाद हाउस स्थित हैं.

मीडिया से बातचीत में गृह सचिव जीके पिल्लै ने कहा है, "लश्करे तैबा कार्यकर्ता डेविड हेडली ने इस जगह (ओशो आश्रम) का ज़िक्र किया था और ये जानकारी महाराष्ट्र पुलिस को दी गई थी."

मीडिया से बातचीत में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने कहा, "इस हमले के लिए कौन ज़िम्मेदार है, इस बारे में मैं किसी व्यक्ति या संगठन का नाम नहीं लूँगा. हम फ़िलहाल इस बारे में किसी नतीजे पर नहीं पहुँचे हैं और जाँच चल रही है. ये बहुत ही भीषण धमाका था और मृतकों की संख्या बढ़ सकती है."

उनका कहना था, "जहाँ-जहाँ कथित लश्करे तैबा कार्यकर्ता डेविड हेडली गए थे वहाँ सुरक्षा बढ़ा दी गई थी. इस समय रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डे हाई अलर्ट पर हैं...इस समय लोगों को संयम बरतना चाहिए और जब तक जाँच पूरी न हो जाए तब तक अटकलें नहीं लगानी चाहिए."

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने मृतक के परिजनों के लिए पाँच लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है.

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