'पीड़ित का बयान अंतिम सत्य नहीं'

  • 15 फरवरी 2010
सुप्रीम कोर्ट
Image caption सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार के मामले में महत्वपूर्ण फ़ैसला दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बलात्कार के मामले में पीड़ित महिला का बयान अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता है.

आम तौर पर बलात्कार के मामलों में पीड़ित के बयान पर ही मामला बनाया जाता है.

न्यायमूर्ति एचएस बेदी और जेएम पांचाल की खंडपीठ ने कहा कि पीड़ित के बयान को महत्व दिया जाना चाहिए लेकिन ये नहीं माना जा सकता कि पीड़ित महिला जो भी कह रही है वो अकाट्य सत्य है क्योंकि तब तक अभियुक्त पर आरोप सिद्ध होने होते हैं.

खंडपीठ का कहना है कि बलात्कार के मामले के आरोप भी किसी और अन्य आपराधिक मामले की तरह होते हैं यानी आरोपों को बाद में सिद्ध किया जाना होता है.

अदालत के आदेश में कहा गया है, ‘‘ हमारी राय है कि बलात्कार के मामले में पीड़ित का बयान अत्यंत ज़रुरी है.लेकिन मूल सिद्धांत ये है कि अभियोजन पक्ष को किसी भी मामले में अपने आरोप सिद्ध करने होते हैं और बलात्कार के मामले में भी यह नियम लागू होते हैं. इसलिए ये न माना जाए कि पीड़ित एकदम सच्ची कहानी बता रही है.’’

कोर्ट ने बलात्कार के ही एक मामले में ये फै़सला सुनाया है. इस मामले में कोर्ट ने अब्बास अहमद चौधरी को निर्दोष क़रार देते हुए ये फ़ैसला दिया.

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