ओशो आश्रम को अब भी सुरक्षा नहीं

ओशो आश्रम
Image caption ओशो आश्रम में काफ़ी विदेशी आते और रहते हैं

पुणे में स्थित ओशो आश्रम में अब भी चरमपंथियों के निशाने पर है, लेकिन एक भी पुलिस अधिकारी उसकी सुरक्षा के लिए तैनात नहीं है.

पुणे का जर्मन बेकरी रेस्तरां इस आश्रम के बहुत क़रीब है. शनिवार को ही जर्मन बेकरी में धमाका हुआ था, जिसमें नौ लोग मारे गए थे.

संन्यास लेकर आश्रम में रहने वाली एक महिला अनुपमा ने बीबीसी को बताया कि अभी तक उनके आश्रम में किसी प्रकार की पुलिस सुरक्षा नहीं है. अंदर जाने वालों की किसी प्रकार की जांच नहीं होती.

अनुपमा के मुताबिक़ जर्मन बेकरी में धमाके के बाद आश्रम में एक बैठक हुई जिसमें स्क्रीनिंग मशीन लगाने की बात मंज़ूर की गई है.

आश्रम में इस वक़्त 500-600 लोग हैं, जिनमें ज़्यादातर विदेशी हैं.

बेल्जियम के एक ओशो संन्यासी ने अपना नाम गुप्त रखते हुए पुणे में हुए धमाके पर दुख प्रकट करते हुए कहते हैं कि वे यहाँ शांति की तलाश में आए थे लेकिन उन्हें यहाँ भी शांति नहीं मिल रही है.

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के धमाके से यह पता चलता है कि यहाँ भी नफ़रत बढ़ गई है.

'सुरक्षा दी जाएगी'

ओशो आश्रम की पुलिस सुरक्षा के बारे में पुणे के कमिश्नर डॉक्टर सत्यपाल सिंह का कहना था कि अब आश्रम को सुरक्षा प्रदान की जाएगी.

रविवार की शाम सत्यपाल सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि इस धमाके में नौ लोग मारे गए हैं जिनमें दो विदेशी भी शामिल हैं. उनमें इटली की नादिया मेकरानी और ईरान के एक छात्र सईद अब्दुल ख़ालिक़ हैं.

उन्होंने बताया कि 60 घायलों में 12 विदेशी हैं. इनमें पांच ईरानी, दो सूडानी, दो नेपाली, यमन, ताइवान और जर्मनी के एक-एक नागरिक शामिल हैं.

उन्होंने कहा कि देश की सारी सुरक्षा एजेंसियाँ इस मामले की जांच कर रही हैं और एक-दो दिनों में वह इस केस को हल कर लेंगे.

उन्होंने यह भी दावा किया कि अब तक किसी को भी इस मामले में हिरासत में नहीं लिया गया है.

आतंकवाद निरोधक दस्ते के मुख्य अधिकारी पीके रघुवंशी ने बीबीसी को बताया कि अभी जांच जारी है और वह इस समय किसी संगठन का नाम नहीं लेना चाहते हैं.

जहाँ तक पुणे के नागरिकों का सवाल है तो वह पुलिस के काम-काज से काफ़ी नाराज़ हैं.

वह उस स्थान पर बड़े-बड़े बैनर और पोस्टर लिए खड़े थे. उनका कहना है कि पुणे काफ़ी समय से चरमपंथियों की हिट लिस्ट पर है लेकिन फिर भी पुलिस ने इन स्थानों में से किसी को सुरक्षा प्रदान नहीं की.

पुणे में राजनेताओं के आने का सिलसिला जारी है, साथ ही अस्पतालों में घायलों को देखने आने वाले रिश्तेदारों का तांता लगा हुआ है.

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