माओवादियों का पक्ष रखने वाले भी निंदा करें: चिदंबरम

पी चिदंबरम
Image caption चिदंबरम ने माना की सुरक्षा के कुछ पहलुओं में खामियाँ रहीं

भारत के गृह मंत्री पी चिदंबरम ने माना है कि पश्चिम बंगाल में माओवादियों के हमले में 24 सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने की घटना से सुरक्षा में कुछ खामियों के संकेत मिले हैं. लेकिन उन्होंने ज़ोर देकर कहा है कि माओवादियों का पक्ष रखने वाले लोग भी इस हमले की निंदा करें.

दिल्ली में चिदंबरम ने कहा, "मुझे पता है कि इस देश में बहुमत सीपीआई (माओवादी) की हिंसा की निंदा करेगा और केंद्र-राज्य सरकार के प्रयासों का समर्थन करेगा. लेकिन मैं इस घटना की निंदा की आवाज़ें उन लोगों से सुनना चाहता हूँ जिन्होंने ग़लती से माओवादियों को बौद्धिक और आर्थिक मदद की है."

पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मिदनापुर में माओवादियों ने सोमवार की शाम सुरक्षा बलों के एक शिविर पर हमला किया था.

शिविर में अंधाधुंध फ़ायरिंग हुई और फिर आग लगा दी गई थी जिसके कारण मरने वाले जवानों की संख्या 24 हो गई है. दस लोग घायल हुए थे जबकि अधिकारियों का कहना है कई जवान लापता भी हैं.

सीपीआई (माओवादी) के प्रवक्ता किशनजी ने इस हमले की ज़िम्मेदारी स्वीकार करते हुए कहा है, "पी चिदंबरम के ग्रीन हंट के जवाब में यह हमारा पीस हंट है."

कोटेश्वर राव ने ज़िम्मेदारी ली

ग़ौरतलब है कि इस घटना के बाद सीपीआई (माओवादी) के प्रवक्ता कोटेश्वर राव उर्फ़ किशनजी ने इस हमले की ज़िम्मेदारी स्वीकार करते हुए कहा है, "पी चिदंबरम के ग्रीन हंट के जवाब में यह हमारा पीस हंट है."

मीडिया में माओवादियों के ख़िलाफ़ सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई को ग्रीन हंट दिया गया है जबकि भारत सरकार ने इस अभियान को कोई विशेष नाम से नहीं दिया है.

पश्चिम बंगाल में नक्सलियों का हमला लालगढ़ से सटे सिल्दा में इस्टर्न फ़्रंटियर राइफ़ल्स के जवानों के कैंप पर हुआ. बीबीसी के पश्चिम बंगाल संवाददाता सुबीर भौमिक के अनुसार ये नया कैंप है और अभी वहाँ सुरक्षा के पूरे इंतज़ाम नहीं किए गए थे.

इस घटना के बाद उधर बीबीसी के झारखंड संवाददाता सलमान रावी ने ख़बर दी है कि सोमवार को देर रात माओवादियों ने झारखंड के पूर्वी सिंहभूम के पास केंद्रीय रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स (सीआरपीएफ़) के एक कैंप पर भी हमला किया है और वहां मंगलवार की सुबह तक मुठभेड़ जारी थी.

'संयुक्त अभियान चलाया जाएगा'

महत्वपूर्ण है कि गृह मंत्री चिदंबरम की कोलकाता में उड़ीसा, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के अधिकारियों के साथ बातचीत के एक हफ़्ते बाद ही ये हमला हुआ है.

चिदंबरम का कहना था कि यदि पूरा देश एकजुटता से सीपीआई (माओवादी) के 'आज़ादी के सशस्त्र संघर्ष' को नकारता है तभी संघर्ष वाले क्षेत्रों में विकास और प्रगति हो पाएगी.

गृह मंत्री चिदंबरम ने कहा, "इस घटना से सुरक्षा में खामियों के कुछ संकेत मिले हैं लेकिन पूरी जाँच के बाद ही पता चलेगा कि इतनी संख्या वाले पुलिस शिविर को सीपीआई (माओवादियों) ने किस तरह घेर लिया."

उनका कहना था, "उनका लक्ष्य सत्ता हासिल करना है. उनका हथियार हिंसा है. किसी लोकतांत्रिक देश में किसी संगठन या ग्रुप को ये हक़ नहीं कि वह वैध तौर पर स्थापित सरकार के ख़िलाफ़ हिंसा करे. दुर्भाग्यपूर्ण है कि जो संगठन सीपीआई (माओवादी) के आज़ादी के सशस्त्र संघर्ष को वैध मानते हैं उन्हें इस साधारण सच पता नहीं है."

पश्चिम बंगाल की घटना पर राज्य के पुलिस प्रमुख भूपेंद्र सिंह ने पत्रकारों को बताया, "हमें इस बात का अंदाज़ा नहीं था कि माओवादी ऐसा इलाक़े में भी घुस जाएँगे. इस शिविर को स्थानीय लोगों में भरोसा पैदा करने के लिए बनाया गया था. हमें पता है कि ऐसे हमले दोबारा भी होंगे. हम इसस शिविर को किसी बेहतर जगह पर स्थापित करेंगे."

पश्चिम बंगाल के पुलस प्रमुख का कहना था, "हम इस घटना और अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करेंगे...कोटेश्वर राव को पकड़ने के लिए वही प्रक्रिया जारी रहेगी जो अब तक रही है...जब तक हमें जानकारी मिली थी तब तक वे उड़ीसा में बताए जा रहे थे...इस घटना के लिए ज़िम्मेदार लोगों को पकड़ने के लिए संयुक्त अभियान चलाया जाएगा. हमने पहले ही इस इलाक़े के लिए अतिरिक्त सुरक्षा का अनुरोध कर रखा है."

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