सज्जन के ख़िलाफ़ ग़ैरज़मानती वारंट

सज्जन कुमार
Image caption सज्जन कुमार को 1984 के दंगों के आरोपों से छुटकारा नहीं मिल सका है

दिल्ली की एक अदालत ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार के नाम ग़ैरज़मानती वारंट जारी कर दिया है.

वर्ष 84 के सिख विरोधी दंगों के अभियुक्त सज्जन कुमार को कड़कड़डूमा कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होना था लेकिन सज्जन कुमार ने अपने वकीलों के ज़रिए कोर्ट से दरख्वास्त की कि उनकी जगह उनके वकील को उनका पक्ष रखने की अनुमति दी जाए.

लेकिन कोर्ट ने ये कहकर सज्जन कुमार के वकीलों की दलील को मानने से इनकार कर दिया कि ये हत्या का मामला है और ऐसे में उन्हें व्यक्तिगत पेशी से छूट नहीं दी जा सकती.

सज्जन कुमार के वकील ने कोर्ट से ये कहकर समय मांगा कि उनकी अग्रिम ज़मानत की अपील पर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है इसलिए उन्हें थोड़ा वक्त दिया जाए.

लेकिन कई बार समय देने के बाद भी जब सज्जन कुमार खुद पेश नहीं हुए तो कोर्ट ने उनके खिलाफ ग़ैरज़मानती वारंट जारी कर दिया.

दंगा पीड़ितों के वकील एच एस फुल्का ने बताया कि अब मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को होनी है.

उल्लेखनीय है कि सज्जन कुमार की ओर से हाई कोर्ट में दाखिल अग्रिम ज़मानत की अर्जी पर गुरुवार को सुनवाई होगी.

सज्जन कुमार और पांच अन्य अभियुक्तों के ख़िलाफ़ 1984 के सिख विरोधी दंगों में दिल्ली के सुल्तानपुरी और कैंट इलाके में एक हिंसक भीड़ का नेतृत्व करने का आरोप है. इस हिंसा में कई लोग मारे गए थे.

सज्जन कुमार दंगे भड़काने के आरोपों का लगातार खंडन करते रहे हैं लेकिन दंगों के 25 वर्ष बाद भी उन्हें इन आरोपों से छुटकारा नहीं मिल सका है.

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