'अदालत दे सकती है सीबीआई जांच के आदेश'

सुप्रीम कोर्ट
Image caption सुप्रीम कोर्ट ने यह फ़ैसला पश्चिम बंगाल सरकार और अन्य की याचिक पर सुनाया है

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि राज्य सरकार की सहमति के बिना भी सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) को किसी मामले की जांच का आदेश दे सकते हैं.

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस अधिकार का उपयोग कभी-कभार और सावधानी के साथ ही किया जाना चाहिए.

बुधवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से लिए गए इस फ़ैसले में कहा कि सर्वोच्च न्यायलय और उच्च न्यायालयों को इस तरह की शक्ति का प्रयोग सतर्कतापूर्वक करना चाहिए.

संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति आरवी रविन्द्रन, न्यायमूर्ति डीके जैन, न्यायमूर्ति पी सदासिवम और न्यायमूर्ति जेएम पांचाल शामिल थे.

'राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय मामले'

संविधान पीठ ने कहा कि इस अधिकार का इस्तेमाल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व वाले मामलों में असाधारण और विशष्टि हालात में होना चाहिए.

न्यायालय का कहना था कि यदि ऐसा न हुआ तो सीबीआई के पास नियमित मामलों में ऐसे निर्देशों की बाढ़ आ जाएगी.

अदालत ने कहा की सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट जनता के मौलिक अधिकारों के संरक्षक हैं इसलिए इन अदालतों को यह अधिकार मिला हुआ है.

सुप्रीम कोर्ट ने यह फ़ैसला पश्चिम बंगाल सरकार और कुछ अन्य की एक याचिका पर दिया है.

वर्ष 2001 में कोलकाता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के एक कार्यकर्ता की हत्या की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे. इसी आदेश को पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी जिसके चलते सर्वोच्च न्यायलय ने ये महत्वपूर्ण फ़ैसला सुनाया है.

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