गणित-विज्ञान का समान पाठ्यक्रम

कपिल सिब्बल ने विभिन्न शिक्षा बोर्डों के सदस्यों से मुलाक़ात की है

मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा है कि अगले शैक्षणिक सत्र से सभी स्कूलों में 11वीं और 12वीं के लिए विज्ञान और गणित का समान पाठ्यक्रम लागू होगा.

नई दिल्ली में जानकारी देते हुए कपिल सिब्बल ने कहा, "भारत भर में अब विज्ञान स्ट्रीम के छात्रों के लिए एक जैसा सिलेबस होगा. ये फ़ैसला सभी स्कूल बोर्डों पर लागू किया जाएगा. ये एक एतिहासिक मौका है."

मंगलवार को मंत्री ने देश भर के करीब 20 शिक्षा बोर्ड के संगठन के सदस्यों से मुलाकात की और ये फ़ैसला सबकी सहमति से किया गया है.

इसके अलावा ये निर्णय भी लिया गया कि 2013 में मेडिकल व इंजीनियरिंग में दाखिले के लिए एक ही प्रवेश परीक्षा होगी.

नई दिल्ली में मंत्री ने कहा कि इससे दाखिला लेने की प्रक्रिया ज़्यादा सुचारू रूप से चल पाएगी. इसका स्वरूप तय करने के लिए एक टास्क फ़ोर्स गठित किया जाएगा.

वर्तमान में विद्यार्थियों को विभिन्न संस्थानों में दाखिले के लिए कई प्रवेश परिक्षाएँ देनी पड़ती हैं.

गणित व विज्ञान में एक जैसे पाठ्यक्रम के बाद कॉमर्स और अन्य विषयों में भी समान सिलेबस की बात उठने लगी है.

इससे पहले सोमवार को कपिल सिब्बल ने दिल्ली में स्कूल के प्राध्यपकों से मुलाक़ात की थी जिसमें नर्सरी में दाखिले के लिए उम्र तीन वर्ष से बढ़ाकर चार वर्ष करने पर सहमति बनी है.

लेकिन ये फ़ैसला तभी लागू हो सकता है जब दिल्ली सरकार इसे मंज़ूरी देती है.

अहम बदलाव

पिछले एक साल में शिक्षा के क्षेत्र में कई अहम फ़ैसले लिए गए हैं.

2009 में कपिल सिब्बल ने दसवीं की परीक्षा वैकल्पिक करने का फ़ैसला किया था यानि विद्यार्थियों को अब दसवीं की बोर्ड परीक्षा देना अनिवार्य नहीं होगा.

ये फ़ैसला 2010-11 के सत्र से लागू हो जाएगा जबकि चालू सत्र से ग्रेंडिंग प्रणाली लागू हो गई है.

हालाँकि बोर्ड की परीक्षा देने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) व्यवस्था करेगा.

इस साल मार्च में 10वीं की बोर्ड परीक्षा में शामिल हो रहे आठ लाख से ज़्यादा छात्रों को परीक्षा तो देनी होगी, लेकिन नतीजे अंकों में नहीं बल्कि ग्रेडिंग सिस्टम के आधार पर मिलेंगे.

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