'धर्मों के बीच समानता अधिक'

भारतीय मुस्लिम

'धर्म का संदेश शांति है और वो नफ़रत और बैर नहीं सिखाता. मौजूदा स्थिति में धर्म और संप्रदायों से ऊपर उठकर मानवीय रिश्तों को मज़बूत करने की आवश्यकता है'

यह बातें इस्लाम और दक्षिण एशियाई धर्मों के बीच संवाद की स्थापना और उनमें पाई जाने वाली ग़लतफ़हमियों को दूर करने के लिए आयोजित एक सर्वधर्म सम्मेलन में शामिल प्रतिनिधियों ने कही.

इस दो दिवसीय सम्मेलन में सिर्फ़ और सिर्फ़ शांति की बात की गई, मज़हब के असल रुह और सिद्धांत को समझने पर ज़ोर दिया गया.

नफ़रत पर जीत पाने के लिए मौलाना अरशद मदनी ने नुस्ख़े भी पेश किए गए और कहा, "आग को आग से नहीं बुझाया जा सकता है, अगर हमें सांप्रदायिकता को मिटाना है तो प्यार और मोहब्बत के दीपक जलाने होंगे."

मोहब्बत का पैग़ाम

उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने भी सम्मेलन को संबोधित किया और कहा कि मज़हब नफ़रत और दुश्मनी की शिक्षा नहीं देता और इस पैग़ाम को आम लोगों के बीच ले जाने की आवश्यकता है.

लेकिन सवाल ये उठता है कि आख़िर ऐसा क्या हुआ कि धर्म शांति का पैग़ाम देने के बजाए नफ़रत पैदा करने के हथियार बन गए.

सम्मेलन में मौजूद पाकिस्तान के सांसद और सिख समुदाय से प्रतिनिधि रैश कुमार ने कहा, "इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय राजनीति होती हैं, लेकिन सभी धर्मों में एक बात तो समान है कि शांति होनी चाहिए और हम इसपर काम कर सकते हैं."

मेहमान प्रतिनिधि का कहना था कि अगर अमन हो जाए तो सारे मसले का हल निकल सकता है.

धर्मों के बीच खाई के मुद्दे पर सम्मेलन के मुख्य आयोजक ज़फ़रुल इस्लाम ख़ान कहते हैं, "धर्मों में समानता बहुत ही अधिक हैं और विराधाभास बहुत ही कम हैं."

सम्मान करना चाहिए

उनका कहना था कि धर्मों के बीच विरोधाभास के बावजूद एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए और ऐसा मुमकिन है.

शांति स्थापित करने का रास्ता आर्ट ऑफ़ लीविंग के सदस्य स्वामी सदयोजथाह ने भी पेश किया.

उनका कहना था, "धर्म में मूल्य, प्रतीक और अनुष्ठान जैसी तीन बुनियादी चीज़ें हैं. सभी धर्मों के प्रतीक और अनुष्ठान अलग-अलग हो सकते हैं लेकिन मूल्य यानी संदेश एक है, शांति का. और इस पर सभी इकट्ठा हो सकते हैं."

सम्मेलन में भारत के सुनहरे दौर का ज़िक्र करते हुए मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि यहाँ की मिट्टी में प्यार और मोहब्बत है और सदियों से सभी धर्मों के लोग मिल-जुलकर रहते रहे हैं, इतिहास इसका गवाह है.

कुछ उदाहरण पेश करते हुए मौलाना अरशद मदनी ने कहा, "महाराजा रणजीत सिंह जैसे कट्टर हिंदू राजा के यहाँ मुसलमान मंत्री थे वहीं अकबर के दरबार में भी हिंदू वज़ीर थे."

उनका कहना था कि हमें अपने अतीत में झांकने की आवश्यकता है ताकि प्यार के पुराने दौर को एक बार पा लिया जाए.

इस सम्मेलन में पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया से हिंदू,सिख, ईसाई, जैन, इस्लाम और बौद्ध मतों के बड़ी तादाद में प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और सबने शांति की बात की.

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