सदन सुचारु रुप से चलाने में सहयोग करें

संसद के बजट सत्र के शुरु होने से कुछ ही देर पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सभी विपक्षी पार्टियों से अपील की है कि वो सदन को सुचारु रुप से चलाने में सहयोग करें.

ऐसी संभावना है कि संसद के बजट सत्र के दौरान विपक्षी दल मंहगाई और फर्टिलाइज़र सब्सिडी खत्म किए जाने के मुद्दे पर सरकार को घेर सकती है और सत्र हंगामेदार हो सकता है.

प्रधानमंत्री ने संसद में आने से पहले संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘मैं सभी सांसदों से अपील करता हूं कि वो इस सत्र को सुचारु रुप से चलाने में सहयोग करें. इस सत्र में रेल बजट, आम बजट पारित होना है. और भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी है. ’

यह पूछे जाने पर कि विपक्ष फर्टिलाइज़र सब्सिडी ख़त्म किए जाने के मामले में हंगामा कर सकता है तो प्रधानमंत्री का कहना था कि सदन में हर मुद्दे पर बहस की गुंजाइश रहती है.

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के अभिभाषण से शुरू होने वाला बजट सत्र सात मई तक चलेगा. इस दौरान 24 फरवरी को रेल बजट और 26 फरवरी को आम बजट पेश होगा.

प्रमुख विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पाकिस्तान के साथ सचिव स्तर की वार्ता को लेकर भी सरकार से नाराज़ है.

पार्टी इस मुद्दे पर सदन में बहस चाहती है. भाजपा के साथ-साथ वामपंथी दल ये भी चाहते हैं कि सरकार अपनी उर्वरक नीति पर भी चर्चा कराए.

संकेत

केंद्र सरकार ने बढ़ती क़ीमतों के मुद्दे पर मंगलवार को बहस कराने की विपक्षी पार्टियों की मांग को मानने का संकेत दिया है.

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में कहा, "हम किसी भी मुद्दे पर बहस के लिए तैयार हैं. अगर विपक्षी दल बढ़ती क़ीमतों पर बहस चाहते हैं, तो हम इस पर विचार कर सकते हैं."

महंगाई के अलावा जिन मुद्दों पर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है, वो हैं- पुणे धमाका, आंतरिक सुरक्षा का मुद्दा, माओवादियों पर नीति और तेलंगाना का मुद्दा.

भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नक़वी ने कहा, "क़ीमतों में बढ़ोत्तरी के अलावा हमारी पार्टी किसानों से जुड़े मुद्दे उठाएगी. हम पाकिस्तान के साथ वार्ता करने के सरकार के फ़ैसले पर भी बहस चाहते हैं. हम आतंकवाद और माओवादी हिंसा का मुद्दा भी उठाएँगे."

संसद के बजट सत्र के दौरान 36 विधेयक पेश किए जाएँगे, जिनमें से एक परमाणु जवाबदेही विधेयक भी है. इस विधेयक पर वामपंथी दलों को आपत्ति है.

असैन्य परमाणु क्षेत्र में अमरीकी कंपनियों के आने से पहले इस विधेयक का पास होना ज़रूरी है लेकिन वामपंथी इसका विरोध कर रहे हैं.

संबंधित समाचार