'बातचीत का फ़ोकस आतंकवाद'

  • 22 फरवरी 2010

भारत की विदेश सचिव निरुपमा राव ने कहा है कि पाकिस्तान के साथ होने वाली सचिव स्तर की बातचीत में मुख्य मुद्दा सीमा पार से होने वाला आतंकवाद ही होगा.

लंदन में एक सेमिनार में बोलते हुए उन्होंने कहा कि "भारत कभी भी बातचीत का रास्ता बंद नहीं करना चाहता."

निरुपमा राव 25 फ़रवरी को पाकिस्तान के विदेश सचिव सलमान बशीर से दिल्ली में मुलाक़ात करेंगी, 26 नवंबर 2008 को मुंबई पर हुए हमले के बाद यह पहला मौक़ा होगा जब भारत और पाकिस्तान के बीच औपचारिक तौर पर सीधी बातचीत होगी.

मुंबई के हमलों के बाद से ठप पड़ी समग्र वार्ता की शुरूआत के पहले क़दम के रूप में इस बातचीत को देखा जा रहा है लेकिन निरुपमा राव ने कहा कि आतंकवादी संगठनों के ख़िलाफ़ ठोस कार्रवाई समग्र वार्ता के लिए 'बिल्कुल अनिवार्य' है.

दिल्ली में होने वाली सचिव स्तर की बातचीत के बारे में उन्होंने कहा कि भारत "धीरे-धीरे और बहुत सोच समझकर क़दम आगे बढ़ाएगा".

लंदन में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटिजिक स्टडीज़ के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि वे 25 फ़रवरी की बातचीत के बाद और अधिक कुछ कहने की स्थिति में होंगी.

निरुपमा राव ने कहा कि भारत कश्मीर समस्या का हल द्विपक्षीय तरीक़े से ही करना चाहता है लेकिन फ़िलहाल सचिव स्तर की बातचीत में मुख्य रूप से आतंकवाद के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में अब भी आतंकवाद का तंत्र मौजूद है और उसे ख़त्म करने के लिए पाकिस्तान को ठोस क़दम उठाने चाहिए.

राव ने कहा कि पाकिस्तान अब तक कुछ ख़ास संगठनों को निशाना बनाता रहा है और दूसरों की अनदेखी करता रहा है, उसे यह रवैया बदलना होगा.

अफ़ग़ानिस्तान में भारत की भूमिका पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में भारतीय विदेश सचिव ने कहा कि भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच निश्चित रूप से बहुत अच्छे और करीबे रिश्ते हैं.

उन्होंने इन आरोपों को ग़लत बताया कि भारत अफ़ग़ानिस्तान के ज़रिए पाकिस्तान को अस्थिर करना चाहता है इसलिए वहाँ अपनी पैठ बढ़ा रहा है.

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