सज्जन को गिरफ़्तार करने का आदेश

  • 23 फरवरी 2010
सज्जन कुमार
Image caption सज्जन कुमार और पाँच अन्य पर 1984 में सिखों के ख़िलाफ़ दंगे भड़काने का आरोप है

दिल्ली की एक अदालत ने नवंबर 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के सिलसिले में मंगलवार को केंद्रीय जाँच ब्यूरो को आदेश दिया है कि कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को गिरफ़्तार कर, अदालत में पेश किया जाए.

अतिरिक्त चीफ़ मैट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट की अदालत ने सज्जन कुमार के नाम गैरज़मानती वारंट जारी किया है.

ग़ौरतलब है कि सज्जन कुमार और पांच अन्य अभियुक्तों के ख़िलाफ़ वर्ष 1984 में सिख विरोधी दंगों में दिल्ली के सुल्तानपुरी और कैंट इलाक़े में एक हिंसक भीड़ का नेतृत्व करने का आरोप है. इस हिंसा में कई सिख मारे गए थे.

सज्जन कुमार दंगे भड़काने के आरोपों का लगातार खंडन करते रहे हैं लेकिन 25 वर्ष बाद भी ये मामले उनका पीछा कर रहे हैं.

'अदालत नाराज़'

सिख दंगा पीड़ितों की संस्था का प्रतिनिधित्व करते रहे वकील एचएस फूलका ने मीडिया को बताया अदालत ने इस बात पर नाराज़गी व्यक्त की कि सज्जन कुमार को अभी तक गिरफ़्तार नहीं किया गया है.

फूल्का के अनुसार, "सीबीआई के पुलिस महानिरीक्षक को आदेश दिया गया है कि सज्जन को कुमार को गिरफ़्तार कर अदालत के समक्ष पेश किया जाए. सीबीआई के निदेशक को आदेश दिया गया है कि वे इन मामले का निरीक्षण करें."

सज्जन कुमार ने एक अर्ज़ी दाख़िल कर निवेदन किया था कि उन्हें व्यक्तिगत तौर पर अदालत में पेश होने से मुक्त कर दिया जाए क्योंकि उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय के सामने ज़मानत की अर्ज़ी दे रखी है जिस पर आदेश सुरक्षित रखा गया है.

अतिरिक्त चीफ़ मैट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट की अदालत ने उनके वकील की दलाली नहीं मानी और दस मार्च के लिए गैरज़मानती वारंट जारी कर दिया.

दूसरी ओर सिख संस्थाओं के सदस्य अदालत के बाहर अपनी नाराज़गी जताते और प्रदर्शन करते देखे गए.

इससे पहले भी वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों के अभियुक्त सज्जन कुमार को न्यायालय ने यह कहते हुए व्यक्तिगत पेशी से छूट देने से इनकार कर दिया था कि ये हत्या का मामला है.

उस समय सज्जन कुमार के वकील ने कोर्ट से ये कहकर समय मांगा था कि उनकी अग्रिम ज़मानत की अपील पर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है.

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