निजीकरण से इनकार, यात्री भाड़े में बदलाव नहीं

  • 24 फरवरी 2010
ममता बनर्जी

भारत की रेल मंत्री ममता बनर्जी ने संसद में रेल बजट 2010-2011 पेश करते हुए भारतीय रेल का नया व्यावसायिक मॉडल तैयार करने के तहत निजी क्षेत्र को पूँजी निवेश और भागीदारी के लिए आमंत्रित किया. लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय रेल का निजीकरण नहीं होगा.

ममता बनर्जी ने यात्री किराए भाड़े में और माल भाड़े में कोई बदलाव न करने की पेशकश रखी है. कुछ खाद्य पदार्थों के लिए माल भाड़े में कमी की गई है.

ममता बनर्जी के भाषण के दौरान विपक्षी दलों के अनेक सदस्यों ने बार-बार शोर किया और अपने-अपने चुनावी क्षेत्रों के लिए माँगे सामने रखीं. रेल मंत्री के आश्वासनों के बावजूद शोर होता रहा और उन्होंने ज़्यादा समय अपना भाषण शोर में ही पढ़ा.

'117 नई रेलगाड़ियाँ मार्च तक'

भारतीय रेलवे मिशन - 2020 की बात करते हुए ममता बनर्जी ने निजी क्षेत्र और औद्योगिक घरानों को आमंत्रित किया कि वे सरकार के साथ मिलकर रेल लाइनों का जाल बिछाने और कामकाम संभालने में सहयोग दें.

उनका कहना था कि नया बिज़नेस मॉडल तैयार किया जा रहा है ताकि सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर इस क्षेत्र का विस्तार कर सकें.

ममता बनर्जी ने जिन 120 नई रेलगाड़ियों की पिछले रेल बजट में घोषणा की थी उसमें से 117 मार्च तक चलने लगेंगी और इस साल रेलवे लाइनों का 1000 किलोमीटर का जाल बिछाया जाएगा.

ममता बनर्जी ने 14 लाख रेलवे कर्मचारियों का ज़िक्र करते हुए ज़ोर देकर कहा कि भारतीय रेल का निजीकरण नहीं किया जाएगा.

ममता बनर्जी का कहना था कि भारतीय रेल का लगभग 64 हज़ार किलोमीटर की रेल लाइन का जाल है जिसमें से हर साल औसतन 180 और पिछले पाँच साल में लगभग 200 किलोमीटर रेल लाइन का नेटवर्क बना है.

रेल मंत्री ने ज़ोर देकर ग्रामीण इलाक़ों में रेल का मूलभूत ढांचा उतना नहीं बन पाया है जितना शहरों में और भविष्य में ग्रामीण इलाक़ों में रेल लाइन बनाने को प्राथमिकता दी जाएगी.

उनका कहना था कि नई परियोजनाओं को पारित करने और लागू करने के लिए स्पेशल टास्क फ़ोर्स बनाई जाएगी जो नई परियोजनाओं को पारित करेगी.

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