'समग्र वार्ता का समय अभी नहीं आया'

  • 25 फरवरी 2010

पाकिस्तान के दबाव के बावजूद भारत ने कहा है कि समग्र वार्ता शुरू करने से पहले ज़रूरत है दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई को पाटने की और ये बातचीत उस दिशा में पहला कदम है.

तीन घंटों से भी ज़्यादा चली बातचीत को जहां पाकिस्तानी विदेश सचिव सलमान बशीर ने एक ईमानदार कोशिश का नाम दिया वहीं भारतीय विदेश सचिव निरूपमा राव ने इसे विस्तृत, स्पष्ट और पारदर्शी बताया और कहा कि दोनों पक्षों के बीच “अच्छी केमिस्ट्री” दिखी.

भारतीय विदेश सचिव का कहना था कि इसमें कोई शक नहीं है कि दोनों ही देशों में एक दूसरे के प्रति विश्वास की कमी है और मुंबई हमलों से पहले चल रही समग्र वार्ता भले ही कामयाब रही हो लेकिन अभी उसे शुरू करने का समय नहीं आया है.

उनका कहना था, ``हमने अविश्वास की खाई को कम करने के लिए पहला कदम उठाया है, हम संपर्क में रहेंगे और हमारी कोशिश होगी हर एक कदम के साथ दोनों देशों के बीच विश्वास बहाल करने की.’’

वहीं पाकिस्तान का कहना है कि वो सतही मुलाक़ातों में यकीन नहीं रखते और भारत पाकिस्तान को केवल लेक्चर नहीं दे बल्कि दो स्वतंत्र देशों के बीच जिस तरह से रिश्ते कायम होते हैं उस तरह के रिश्ते कायम करे.

समग्र वार्ता को शुरू नहीं करने पर बशीर का कहना था, "हम भी उतावले नहीं हैं. भारत अपना मन बना ले कि वो किस तरह से बात को आगे बढ़ाना चाहता है वो हमें तैयार पाएंगे.''

उनका कहना था कि कश्मीर समस्या मुख्य मुद्दा है और ये अंतरराष्ट्रीय मामला है.."इसे दरकिनार नहीं किया जा सकता."

भारत ने पाकिस्तान को तीन और दस्तावेज़ भी सौंपे हैं जिनमें से एक में मुंबई हमलों में शामिल कुछ लोगों के बारे में सबूत हैं, दूसरे में चरमपंथी इलियास कश्मीरी की तरफ़ से जारी धमकी का ब्योरा है और तीसरे में उन भगोड़ों को भारत को सौंपने की मांग की गई है जो पाकिस्तान में छिपे हुए हैं.

कश्मीर और बलोचिस्तान

निरूपमा राव का कहना था कि बातचीत में भारत ने पाकिस्तानी ज़मीन से भारत के खिलाफ़ चल रहे आतंकवाद पर ज़ोर दिया वहीं पाकिस्तान ने बलोचिस्तान, कश्मीर और सिंधु नदी के पानी का भी मामला उठाया.

उनका कहना था, ``कश्मीर पर उनका रूख़ वही था जो अबतक रहा है और बलोचिस्तान पर हमने उनसे स्पष्ट कर दिया कि उनके आरोप निराधार हैं.”

पाकिस्तानी पक्ष ने कहा है कि सिर्फ़ आतंकवाद के मसले पर अड़े रहकर बात नहीं बन सकेगी.

उनका कहना था, ``भारत की अपेक्षाओं और जो कदम हम उठा रहे हैं उनके बीच बड़ा फ़ासला है और इसलिए माहौल अविश्वास का है.''

उन्होंने कहा कि भारत के तरफ़ से जो दस्तावेज़ दिए गए हैं पाकिस्तान उन्हें गंभीरता से लेगा.

निरूपमा राव ने कहा है कि अगली बातचीत की कोई तारीख़ तय नहीं हुई है लेकिन पाकिस्तानी विदेश सचिव ने उन्हें पाकिस्तान आने का न्यौता दिया है.

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