मलीहाबादी दशहरी का पेटेंट

  • 27 फरवरी 2010
आम
Image caption आम की अनेक क़िस्में हैं जिनमें दशहरी काफ़ी लोकप्रिय है

लखनऊ के मशहूर मलीहाबादी दशहरी आम को भौगोलिक संकेतक का विशेष कानूनी दर्जा प्राप्त हो गया है.

इससे पहले दार्जीलिंग चाय को इस तरह का दर्जा मिला था.

मलीहाबादी आम को यह विशेष दर्जा भारत सरकार के भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री कार्यालय चेन्नई ने एक विशेष क़ानून के तहत दिया गया है.

एक अलग स्वाद और सुगंध के कारण दशहरी आम की विशेष पहचान है.

केन्द्रीय बागवानी संस्थान लखनऊ में एक जलसा करके स्थानीय किसानों को इसके महत्व के बारे में जानकारी दी गई.

केन्द्रीय कृषि अनुसंधान परिषद् के उप महानिदेशक डॉक्टर एचपी सिंह ने बताया कि भारत में पहली बार किसी फल को भौगोलिक पहचान का क़ानूनी दर्जा दिया गया है.

आम का पेटेंट

डॉक्टर सिंह के मुताबिक़ मलीहाबादी दशहरी का पेटेंट हो जाने से अब किसी और इलाके का आम इस नाम से नही बेचा जा सकेगा.

Image caption कलीमुल्लाह पिछले कई सालों से आम की बाग़बानी कर रहे हैं

मलीहाबाद के किसान अपने आम को ऊँचे दाम पर देश विदेश में बेच सकेंगे.

माना जाता है कि मलीहाबाद में दशहरी आम के बाग़ नवाबी दौर में पठानों ने लगाए थे. बागवानी संस्थान के निदशक डॉक्टर एच रविशंकर के मुताबिक काकोरी ब्लॉक के दशहरी गाँव में इस विशेष आम का लगभग डेढ सौ पुराना मूल वृक्ष अभी सुरक्षित है. इसे धरोहर का दर्जा हासिल है.

आम उत्पादक संघ के अध्यक्ष इन्श्राम अली ने दशहरी आम को यह विशेष कानूनी पहचान मिलने पर ख़ुशी जाहिर की है.

एक ही पेड़ में आम की तीन सौ किस्में उगाने वाले बागबान कलीम उल्लाह ने कहा कि अब मलीहाबादी किसानों की आमदनी बढ़ेगी.

सत्तासी वर्षीय किसान कामिल ख़ान ने वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि दशहरी आम की क़िस्म सुधारने में वह किसानो की मदद करें जिससे यह ज़्यादा दिन तक टिक सके.

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