तेल की क़ीमतों पर संसद में हंगामा

भाररतीय संसद
Image caption विपक्षी सदस्य डीजल-पेट्रोल की बढ़ी हुई क़ीमते वापस लेने की माँग कर रहे थे.

भारतीय संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही बुधवार को डीज़ल और पेट्रोल की क़ीमतों में हुई बढो़त्तरी के ख़िलाफ़ विपक्ष के हंगामें के कारण

पहले 12 बजे और फिर दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी.

होली की छुट्टी के बाद बुधवार को संसद की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के सदस्यों ने डीजल-पेट्रोल की बढ़ी हुई क़ीमतें वापसे लेने की माँग के साथ शोर-शराबा शुरू कर दिया.

इस दौरान कुछ सदस्य अध्यक्ष की कुर्सी के सामने जाकर नारेबाज़ी करने लगे. विपक्ष के शोर-शराबे के कारण दोनों सदनों में प्रश्नकाल भी नहीं हो सका.

उधर, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने पहले कह दिया है कि डीजल-पेट्रोल की बढ़ी हुई क़ीमतें वापस नहीं ली जाएँगी.

सऊदी अरब की यात्रा से वापस लौटते हुए प्रधानमंत्री ने संवाददाताओं से कहा, ''अर्थव्यवस्था में इस बढ़ोत्तरी को समायोजित करने की क्षमता है और इससे महँगाई नहीं बढ़ेगी.''

उनका कहना था, ''क़ीमतों में बढ़ोत्तरी से कुछ लोगों को परेशानी होती है लेकिन हमें दूर की सोचनी है.''

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बुधवार को ही कांग्रेस सांसदों के सामने इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखा.

द्रमुक और तृणमूल कांग्रेस की डीजल-पेट्रोल की बढ़ी क़ीमतों को वापस लेने की माँग के बीच कांग्रेस ने कहा है कि इस माँग के बाद भी ये दोनों पार्टियाँ यूपीए का हिस्सा है.

समाचार एजेंसियों के मुताबिक़ द्रमुक प्रमुख करुणानिधि ने कहा है कि बढ़ी हुई क़ीमतों का प्रभाव आम लोगों पर पड़ेगा, इसलिए वे बढ़ी हुई क़ीमतों के वापस लेने के लिए सरकार पर दबाव बनाते रहेंगे.