नगा नेता ने सौंपी माँगों की सूची

  • 3 मार्च 2010
मुइवा
Image caption वर्ष 2006 के बाद मुइवा पहली बार भारत आए हैं

नगालैंड के अलगाववादी संगठन नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नगालिम (इसाक-मुइवा) यानी एनएससीएन (आईएम) के साथ केंद्र सरकार की बातचीत की अनौपचारिक शुरुआत मंगलवार को शुरु हुई.

एनएससीएन के नेता टी मुइवा ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गृहमंत्री पी चिदंबरम से मुलाक़ात की है.

उन्होंने केंद्र सरकार को अपनी माँगों की 30 सूत्रीय सूची सौंपी है. इसमें नगालैंड को संप्रप्रभुता और स्वायत्तता देने की माँग है.

अधिकारियों का कहना है कि संप्रभुता की माँग पर तो विचार नहीं किया जा सकता लेकिन स्वायत्तता के मामले में बातचीत हो सकती है.

नगा नेता टी मुइवा के साथ आए नगा प्रतिनिधि मंडल और सरकार की ओर से इस बातचीत के लिए मध्यस्थ नियुक्त किए गए पूर्व पेट्रोलियम सचिव आरएस पांडे के बीच औपचारिक बातचीत की शुरुआत बुधवार को होनी है.

वर्ष 1997 में अलगाववादी नगा विद्रोहियों और केंद्र सरकार के बीच बातचीत की शुरुआत हुई थी. इन वर्षों में दोनों के बीच 50 से अधिक बैठकें हो चुकी हैं लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है.

टी मुइवा आरोप लगाते रहे हैं कि संघर्ष विराम का फ़ायदा उठाकर सरकार फ़ैसला टाल रही है.

स्वायत्तता की चर्चा

नगा नेता पहले भी मुख्य रुप से दो माँगें करते रहे हैं. एक तो संप्रभु नगालैंड का और दूसरा मणिपुर, असम और अरुणाचल प्रदेश के हिस्सों को मिलाकर 'वृहत नगालैंड' के निर्माण और उसके लिए और अधिक स्वायत्तता.

वृहत नगालैंड की माँग का असम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश विरोध करते रहे हैं.

लेकिन केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि इस विषय पर और चर्चा हो सकती है.

बीबीसी के पूर्वोत्तर मामलों के संवाददाता सुबीर भौमिक का कहना है कि ऐसा लगता है कि नगा नेताओं ने आज़ादी या संप्रभुता की अपनी माँग अब छोड़ दी है.

उनका कहना है कि नगा नेता टी मुइवा ने बीबीसी से हुई बातचीत में जो संकेत दिए उससे लगता है कि भारत सरकार अब नगा इलाक़ों को और अधिक स्वायत्तता देने पर विचार करने के लिए तैयार हो गई है.

हालांकि वृहत नगालैंड को लेकर केंद्र सरकार अभी भी सख़्त बनी हुई है और उसका कहना है कि इससे दूसरे राज्यों में अनावश्यक गतिरोध खड़ा हो जाएगा.

मुइवा ने कहा है कि यदि केंद्र सरकार नगा समस्या को लेकर गंभीर दिखती है तो नगा विद्रोही बातचीत जारी रखेंगे.

पुरानी समस्या

नगा जनजाति के लोगों ने 1956 में पहली बार विद्रोह किया था.

लेकिन बाद में उनका संगठन कट्टरुपंथियों और नरमपंथियों में विभाजित हो गया. ये नरमपंथी इसके बाद जंगलों से बाहर आ गए.

भारत सरकार और एनएससीएन (आईएम) के बीच 1997 में युद्धविराम हुआ था और तब से शांति प्रक्रिया जारी है. हालांकि इसमें कई बार गंभीर मतभेद भी उभरे हैं.

नगालैंड के कुछ संगठनों ने 50 साल पहले नगालैंड को स्वतंत्र घोषित कर दिया था.

लेकिन भारत सरकार ने इस क़दम को अपनी मान्यता नहीं दी थी और तब से इलाक़े में संघर्ष होता रहा है.

भारतीय सुरक्षा बलों और अलगाववादी गुटों के बीच युद्धविराम से पहले हुए संघर्षों में सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं.

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