आडवाणी-मनमोहन सिंह के बीच नोकझोंक

  • 4 मार्च 2010

लोक सभा में बुधवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और भारतीय जनता पार्टी के नेता लाल कृष्ण आडवाणी के बीच तीखी नोकझोंक हुई.

आडवाणी ने आरोप लगाया कि भारत ने पाकिस्तान के साथ अमरीका के दवाब में बातचीत की है. इसी बात को लेकर दोनों नेताओं के बीच नोकझोंक हुई.

आडवाणी की बात का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि राष्ट्रपति ओबामा के सत्ता में आने के बाद से भारत-पाक संबंधों पर अमरीका का रुख नहीं बदला है.

75 मिनट के आडवाणी के भाषण में प्रधानमंत्री ने कई बार हस्तक्षेप किया और भारत-पाक वार्ता पर अपना पक्ष रखा.

मनमोहन सिंह ने कहा, “आप इस बहस के ज़रिए नए सवाल खड़े करने की कोशिश कर रहे हैं. आप ओबामा के हवाले से जो बोल रहे हैं वो सही नहीं है. बराक ओबामा के साथ मेरी बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया है कि भारत-पाक रिशतों को लेकर अमरीका की नीति बदली नहीं है.”

इससे पहले आडवाणी ने कहा कि ऐसा लगता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुई बातचीत के पीछे अमरीका का हाथ था क्योंकि अपने चुनावी अभियान में ओबामा ने कहा था कि वे कश्मीर का मुद्दा सुलझाने की कोशिश करेंगे.

आडवाणी ने कहा कि ये सब दर्शाता है कि अमरीका की नीति बदल गई है क्योंकि इससे पहले अमरीकी प्रशासन कहता रहा है कि वो भारत-पाक में मध्यस्थता नहीं करेगा.

'काल्पनिक सवालों के जवाब नहीं दूँगा'

बहस के दौरान आडवाणी ने इन रिपोर्टों का भी ज़िक्र किया कि कश्मीर पर भारत-पाकिस्तान के बीच ‘गुप्त’ वार्ता हुई है और सरकार को इस बारे में संसद को बताना चाहिए.

इस पर प्रधानमंत्री चुप नहीं रहे और सवाल उठाया कि क्यों पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह और स्ट्रोब टेलबॉट के बीच हुई बातचीत को संसद के सामने नहीं रखा गया था.

उन्होंने कहा, ‘मैं एक सवाल पूछता हूँ. स्ट्रोब टैलबॉट ने कितनी बार जसवंत सिंह के साथ बातचीत की? ऐसी बैठकों के बारे में कितनी बार संसद को बताया गया? आप क्यों सोचते हैं कि मैं काल्पनिक सवालों का जवाब दूँ?”

इस पर आडवाणी रक्षात्मक शैली में नज़र आए और कहा कि उन्होंने मीडिया में पढ़ा था कि ‘गुप्त’ बैठकें हो रही हैं. उन्होंने कहा कि अगर इन रिपोर्टों में सच्चाई नहीं है तो वे बहुत ख़ुश होंगे.

आडवाणी के भाषण के दौरान सबसे पहले प्रधानमंत्री ने उस समय हस्तक्षेप किया था जब भाजपा नेता ने प्रधानमंत्री की 15 अगस्त के भाषण का ज़िक्र किया. इस भाषण में मनमोहन सिंह ने पूर्व सैनिकों की ‘वन रैंक वन पेंशन’ की माँग पर क़दम उठाने की बात कही थी.

मनमोहन सिंह ने कहा कि सरकार ने जो वादे किए थे वे निभाए हैं और आडवाणी को सरकार और सेना के बीच दरार पैदा करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.

इस पर आडवाणी रक्षात्मक शैली में बोले, मैं दरार पैदा नहीं कर रहा. अगर वो वादे पूरे कर दिए गए हैं तो मुझे खुशी है.

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