तेलंगानाः मांग की पड़ताल शुरू

तेलंगाना आंदोलन (फ़ाइल)

दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश में पृथक तेलंगाना राज्य की मांग का जायज़ा लेने के लिए केंद्र सरकार की श्रीकृष्ण समिति ने गुरुवार से हैदराबाद में अपना काम शुरू कर दिया.

जस्टिस बीएन श्रीकृष्ण और समिति के चार सदस्य कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच आज हैदराबाद पहुंचे. लेकिन फिर भी उन्हें विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ा.

तेलंगाना के समर्थक वकीलों ने एअरपोर्ट पर समिति के विरुद्ध नारे लगाए और प्रदर्शन किया. तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति के नेताओं ने उस गेस्ट हाउस के बाहर प्रदर्शन किया जहाँ समिति के सदस्य ठहरे हुए थे.

तेलंगाना के चार जिलों में कोयले की खदानों में काम कर रहे 70 हज़ार मजदूरों ने हड़ताल करके इस समिति का विरोध किया.

तेलंगाना के समर्थकों का कहना है कि समिति से तेलंगाना राज्य नहीं बनने वाला है और ये इस मामले को ठंडे बस्ते में डालने की एक कोशिश है.

लेकिन दूसरी ओर इस समिति के अध्यक्ष जस्टिस श्रीकृष्ण ने आशा व्याप्त की है कि उन्हें तमाम राजनीतिक दलों और दूसरों का सहयोग मिलेगा.

उन्होंने हैदराबाद में अपने पहले पत्रकार सम्मलेन में कहा कि शुरू में कई दलों ने समिति का विरोध किया था लेकिन जब उन्हें लगा कि समिति अच्छा काम कर रही है और उसकी नियत साफ़ है तो न-न करके वो अब हाँ करने लगे हैं.

Image caption पिछले दिनों एक छात्र ने आंदोलन के दौरान आत्मदाह कर लिया था

जस्टिस श्रीकृष्ण ने कहा कि समिति को ज़मीनी स्थिति समझने में दिलचस्पी है और वो ये जानना चाहती है कि लोग अलग तेलंगाना राज्य के लिए आंदोलन क्यों चला रहे हैं और क्यों कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि अगर एक राजनीतिक दल में इस विषय पर एक से ज़्यादा विचार और मत हों तो समिति उन सबको सुनेगी और जो उसे अच्छा लगेगा, वही सुझाव सरकार को देगी.

उन्होंने छात्रों और युवाओं से अनुरोध किया कि वो आत्महत्या न करें बल्कि अपनी बात समिति के सामने रखें.

समिति के सचिव और सदस्य वीके दुग्गल ने कहा कि समिति लोगों की राय लेने का काम अप्रैल से लेकर जुलाई के अंत तक पूरा कर लेगी ताकि उसे रिपोर्ट लिखने के लिए काफी समय मिल सके और वो अपना काम 31 दिसंबर तक पूरा कर लेगी.

दुग्गल ने कहा कि रिपोर्ट बहुत ही महत्वपूर्ण और मील का पत्थर होगी और उसका हर शब्द सोच-समझकर लिखना पड़ेगा.

दुग्गल ने कहा कि जहाँ तक तेलंगाना के विषय पर ऐतिहासिक जानकारी और रिकॉर्ड का सवाल है, 1952 से लेकर अबतक हर चीज़ और हर आन्दोलन का रिकॉर्ड उपलब्ध है.

समिति को केवल सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, क़ानूनी और संवैधानिक दृष्टि से उसका आकलन करना है और सीधे-सादे अंदाज़ में रिपोर्ट देना है ताकि सरकार और आम लोग, सभी उसे समझ सकें.

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