अल्फ़ा के एक वरिष्ठ नेता को रिहाई

अल्फ़ा अलगाववादी

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय अलगाववादी संगठन अल्फ़ा के एक वरिष्ठ नेता को क़रीब एक दशक बाद रिहाई मिल गई है.

प्रदीप गोगोई उर्फ़ समीरन गोगोई पिछले लगभग एक दशक से जेल में बंद थे. गुरुवार को उन्हें रिहा कर दिया गया है.

अल्फ़ा के उपाध्यक्ष बताए जाने वाले गोगोई को गुरुवार को गुवाहाटी के केंद्रीय जेल से गुरुवार को बेल मिलने के बाद रिहा कर दिया गया.

असम की एक विशेष अदालत ने इन्हें रिहा करने के आदेश दिए हैं.

इससे पहले पिछले सप्ताह ही अल्फ़ा के एक और वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रमुख, मिथिंगा दाइमरी को रिहा किया गया था. गोगोई की रिहाई भी उन्हीं के साथ होनी थी पर गोगोई के वकील समय से बेल की प्रक्रिया के सभी कागज़ात नहीं दे सके थे.

असम की राज्य सरकार ने इस बाबत निर्णय लिया है कि वो इन दोनों अल्फ़ा नेताओं की रिहाई के फ़ैसले को किसी ऊपरी अदालत में चुनौती नहीं देंगे.

माना जा रहा है कि ऐसा इसलिए किया गया है ताकि केंद्र सरकार की ओर से अल्फ़ा के नए उदारवादी चेहरे के साथ बातचीत की प्रक्रिया को नुकसान न पहुँचे. बल्कि उसे और बल मिले.

हालांकि अल्फ़ा के सशस्त्र धड़े के प्रमुख परेश बरुआ अभी भी अपनी इस बात पर क़ायम हैं कि भारत सरकार से बातचीत की या समझौते की स्थिति तभी बन सकती है जबकि सरकार कम से कम असम को संप्रभुता दिए जाने पर सहमत हो.

भारत सरकार की ओर से हमेशा से अल्फ़ा की इस मांग को सिरे से खारिज किया जाता रहा है.

माना जा रहा है कि हाल के दिनों में जेल में बंद अल्फ़ा के कुछ वरिष्ठ नेता अपने रुख़ में कुछ लचीलापन लाते हुए असम की संप्रभुता से पीछे हटकर एक ज़्यादा स्वायत्त असम की मांग की ओर झुके हैं.

गोगोई की ताज़ा रिहाई को इस दिशा में एक अहम क़दम माना जा रहा है. वर्ष 1979 से अल्फ़ा असम की संप्रभुता की लड़ाई लड़ रहा है.

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