भारत में तीन दिन में मिलेंगे पार्सपोर्ट?

पासपोर्ट केंद्र
Image caption सरकार ने अब तक दो आधुनिक पासपोर्ट सेवा केंद्र खोले हैं

भारत में पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया से गुज़रना एक दुखद अनुभव माना जाता है, लेकिन अब विदेश मंत्रालय की कोशिश है कि पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया तीन दिन में ही पूरी कर ली जाए.

शायद इसपर किसी को विश्वास न हो पर विदेश मंत्रालय की कोशिश से ये विचार हक़ीक़त बन सकता है.

बंगलौर में देश के अत्याधुनिक दो पासपोर्ट सेवा केंद्र बनकर तैयार है. फ़ॉर्म उठाइए, भरिए, फिर दस्तावेज़ों की जांच होगी. इन सारी प्रक्रियाओं में महज़ 45 मिनट लगेंगे.

इस बारे में विदेश मंत्री एसएम कृष्णा का कहना है, "देश में पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया में सुधार लाया जाएगा. बेहतर सुविधाएं और पारदर्शी तरीक़े से लोगों तक पासपोर्ट पहुंचेगा."

वर्ष 2009 में 55 लाख पासपोर्ट जारी किए गए, जबकि 2005 में ये संख्या 35 लाख थी. यानि पासपोर्टो की मांग बढ़ रही है और नए युग की ज़रुरतों के हिसाब से इस महकमे के आधुनिकीकरण की ज़रुरत भी है.

इस नई सेवा का सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर, अधिकारियों का प्रशिक्षण और कंप्यूटरीकरण का ठेका टाटा कंसलटेंसी सर्विसेस (टीसीएस) को दिया गया है.

कई सवाल

पर जैसा कि अक्सर होता है, नवीनीकरण के साथ कई सवाल भी उठते है, विरोध के स्वर भी बुलंद होते है और ये परियोजना भी अपवाद नहीं है.

सबसे बड़ी चिंता थी कि पासपोर्ट में लोगों के बारे में संवेदनशील सूचनाएं होती है, राष्ट्रीय सुरक्षा इससे जुड़ी है तो इसे किसी निजी कंपनी के हाथ कैसे दिया जा सकता है और इसके ग़लत हाथों में पड़ने से कैसे रोका जा सकता है.

फिर कंप्यूटर पर सारी सूचनाएं अगर हों तो इनके गुम होने की स्थिति में क्या किया जाएगा.

विदेश मंत्रालय में इस परियोजना के निदेशक नगेंद्र प्रसाद कहते है, "देश भर के पासपोर्टो की सूचनाओं को दिल्ली स्थित डाटा सेंटर में रखा जाएगा और इस का बैकअप चेन्नई में होगा."

वहीं विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के हाथ में सुरक्षा जांच होगी और वे ही तय करेंगे कि पासपोर्ट जारी किया जाए या नहीं.

अब इस सेवा के तहत घर से ही पासपोर्ट फ़ॉर्म भर कर भेजे जा सकते है और पासपोर्ट दफ्तर से समय लिया जा सकता है. अगर किसी आवेदक को पुलिस जांच की ज़रुरत नहीं तो चार दिन में पासपोर्ट उनके हाथ होगा.

पुलिस का काम आसान बनाने के लिए ज़िला स्तर पर पुलिस मुख्यालयों को पासपोर्ट सेवा केंद्र से जोड़ा गया है और अगर सब कुछ अच्छे से चला तो ऐसे 77 पासपोर्ट केंद्र खोलने की सरकार की परियोजना है.

ख़तरा नौकरियों पर

Image caption सरकार ने इस परियोजना को सफल बनाने के लिए निजी कंपनियों से मदद ले रही है

पर कंप्यूटरीकरण और नए कामकाज की शैली से पासपोर्ट दफ्तरों के कर्मचारियों को अपनी नौकरी पर ख़तरा नज़र आ रहा है. वो इस परियोजना का विरोध कर रहे है.

सुरक्षा संबंधी चिंताओं के अलावा उनका तर्क है कि अगर बड़े कामकाज के मद्देनज़र श्रमिकों की संख्या बढ़ाई जाती तो वो स्वयं ही तेज़ी से काम निपटा सकते है.

विदेश मंत्री एस एम कृष्णा ने कहा कि लोगों की सोच नए ज़माने के बदलाव के साथ बदलने की ज़रुरत है और उन्हें आशा है कि उन्हे पूरा सहयोग भी मिलेगा.

उनका कहना था, "‘मेरी दो तीन दौर की बातचीत हुई है, मेरे अधिकारियों की भी हुई है और उनकी सबकी चिंताएं भी दूर की गई है. मुझे खुशी है कि उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम में ज़ोर शोर से भाग लिया और वे भी विदेश मंत्रालय की इस महत्वाकांशी योजना पर गौरव महसूस करेंगे."

तो अब वो दिन दूर नहीं जब विदेश दौरे पर जाने के पहले पासपोर्ट के इंतज़ार में दुबले हुआ जाए. शायद पासपोर्ट बनवाने में बिचौलियों की भूमिका भी ख़त्म होगी.

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