महिला दिवस पर आरक्षण का तोहफ़ा

  • 7 मार्च 2010

महिला दिवस के अवसर पर सोमवार को राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पेश होने जा रहा है. भारत के संसदीय इतिहास में ये अहम मुकाम माना जा रहा है.

इस विधेयक को कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और वामपंथी दलों ने समर्थन की घोषणा की है.

कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने अपने-अपने सांसदों को व्हिप जारी कर सदन में मौजूद रहने और विधेयक के पक्ष में मतदान करने की हिदायत दी है.

राज्यसभा में पेश विधेयक में संसद और राज्य विधान मंडलों में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण दिए जाने का प्रावधान है.

विरोध

पिछले 13 वर्षों से महिला आरक्षण विधेयक सहमति के अभाव में लटका पड़ा है.

कानून मंत्री वीरप्पा मोइली राज्यसभा में विधेयक पेश करने को खड़े होंगे तो उन्हें अपने महिला सांसदों का सहयोग लेना पड़ सकता है.

पिछली बार राज्यसभा में तत्कालीन मंत्री के हाथ से विधेयक छीनने के लिए हुई धक्कामुक्की में महिला सांसदों ने ही उनका बचाव किया था.

लेकिन इस बार कांग्रेस, भाजपा और वामपंथी दलों के सदस्यों की संख्या विरोध कर रहे छोटे दलों के सदस्यों पर भारी पड़ेगी.

Image caption मुलायम सिंह और लालू यादव ने महिला आरक्षण विधेयक के मौजूदा स्वरूप का विरोध करने का फ़ैसला किया है.

इसके पहले दो बार लोकसभा में विधेयक पारित कराने की केंद्र सरकार की कोशिशें नाकाम रही हैं.

लालू यादव की आरजेडी, मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी, मायावती की बहुजन समाज पार्टी और देवगौड़ा इस विधेयक के मौजूदा स्वरूप का विरोध कर रहे हैं.

उनकी दलील है कि इस आरक्षण में पिछड़ी महिलाओं को अलग से आरक्षण दिया जाना चाहिए, वरना ज्यादातर सीटों पर पढ़ी-लिखी शहरी महिलाओं का कब्ज़ा हो जाएगा.

लखनऊ में पत्रकारों से बात करते हुए मुलायम सिंह यादव ने कहा कि ये पिछड़ों, मुसलमानों और दलितों को संसद में आने देने से रोकने की साज़िश है तो लालू यादव ने इसे भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस की साज़िश बताया.

विधेयक के पक्ष में वकालत करने वालों का तर्क है कि पिछड़ी महिलाओं के लिए आरक्षण की बहस में कोई दम नहीं है

विधेयक के विरोधियों को बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल-यू के नेता नीतीश कुमार के समर्थन देने की घोषणा से झटका लगा है और सरकार को राहत मिली है.

रणनीति

राज्यसभा में 233 सदस्य हैं और माना जा रहा है कि राज्यसभा में लगभग 26 सदस्य इसका विरोध कर सकते हैं.

जनता दल-यू के सदस्यों की राय नीतीश कुमार के बयान के बाद विभाजित हो गई है.

संविधान में संशोधन के लिए विशेष बहुमत की आवश्कता होती है और राज्यसभा में 155 सदस्यों की समर्थन की ज़रूरत पड़ेगी.

लेकिन विधेयक को 165 से अधिक सदस्यों का समर्थन हासिल है.

सरकार इस विधेयक को राज्यसभा में इसलिए पेश कर रही है क्योंकि ये भंग नहीं होती इसीलिए हंगामे और विरोध के बाद भी अगर किसी कारण से विधेयक को पारित कराने में सरकार असफल रही तब भी विधेयक अस्तित्व में बना रहेगा.

हालांकि इस बार राज्यसभा में इसके पारित होने में भाजपा और कांग्रेस दोनों को कोई परेशानी नहीं दिख रही.

इस विधेयक के बाद लोक सभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फ़ीसदी आरक्षण मिलेगा.

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