दो बाघों की अकाल मौत

बाघ
Image caption बाघों की आबादी तेज़ी से कम हो रही है.

बाघों की पनाहगाह के रूप में दुनियाभर में मशहूर राजस्थान के सवाई माधोपुर ज़िले के रणथम्भोर अभ्यारण्य में कम उम्र के दो बाघों को ज़हर देकर मार दिया गया.

राजस्थान सरकार ने घटना की जाँच के आदेश दिए है. वन विभाग को लगता है कि आसपास के लोगों ने बदले की भावना से इन दो बाघों को मारा है.

दोनों बाघों के शव बरामद कर लिए गए हैं. मारे गए बाघ दो साल के थे.

राज्य के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक आरएन मेहरोत्रा ने बीबीसी को बताया कि इन बाघों के साथ एक बकरी भी मरी हुई पाई गई है. ऐसा लगता है कि पहले बाघ ने बकरी का शिकार किया है और फिर किसी ने ज़हर देकर उन्हें मौत के घाट उतार दिया.

वन विभाग के मुताबिक़ ये हादसा दो दिन पुराना है जो अब नज़र में आया है. इन दोनों बाघों के शव अभ्यारण्य के कोरे एरिया से 15 किलोमीटर दूर मिले हैं.

पिछली वन्यजीव गणना में रणथम्भोर अभ्यारण्य में 41 बाघ होने की जानकारी मिली थी. इस हादसे के बाद वहाँ सुरक्षा बढ़ा दी गई है. वन विभाग इस हादसे को शिकारियों की करतूत नहीं मान रहा है.

कोशिश

अभ्यारण्य के निकट गांव बसे हैं और मवेशी भी बड़ी तादाद में है. जंगल का बादशाह शिकार करते हुए कई बार बाहर आ जाता है और पालतू मवेशियों को अपना निवाला बना लेता है.

ऐसी घटनाओं से ग्रामीण नाराज़ भी रहते है. वन विभाग ने हाल में दो बाघों को अलवर के निकट सरिस्का अभ्यारण्य में बसाया है क्योंकि रणथम्भोर में बाघों का दबाव बढ़ गया था.

पिछले कुछ वर्षों में बाघों पर शिकारियों की नज़र रही है. सरिस्का में भी कभी बाघ थे. मगर शिकारियों ने उन्हें एक-एक कर मौत के घाट उतार दिया. अब वहाँ फिर से बाघों को आबाद किया गया है.

जयपुर से 165 किलोमीटर दूर यह अभ्यारण्य लगभग 392 वर्ग किलोमीटर में फैला है. अरावली और विन्ध्य पर्वतमालाओं के बीच इस अभ्यारण्य में बाघों का विचरण देखने दुनियाभर से सैलानी आते है.

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