महिला आरक्षण विधेयक राज्यसभा में पारित

लालू
Image caption लालू, मुलायम और शरद यादव महिला विधेयक का विरोध कर रहे हैं.

महिला आरक्षण विधेयक राज्यसभा में भारी बहुमत से पारित हो गया है.

इस मुद्दे पर राज्यसभा में ख़ासा हंगामा हुआ और सात सासंदों को शेष सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया. भारी हंगामे के बीच राज्यसभा की कार्यवाही फिर शुरु हुई और विपक्ष के नेता अरुण जेटली और अन्य सांसदों ने अपनी बात रखी.

भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि बिल पर बहस के बिना वोटिंग शुरु कैसे हो सकती है. अरूण जेटली ने कहा कि इस तरह बिल पारित करवाने का वो समर्थन नहीं करते हैं. बहस के दौरान अरूण जेटली ने कहा कि ये ऐतिहासिक विधेयक है लेकिन संसद में जो कुछ हुआ वो सबको शर्मसार करने वाला है.

इससे पहले विधेयक का विरोध करने वाले लगातार नारेबाज़ी करते रहे.

सभापति ने कई बार सांसदों से बहस शुरु करने देने का आग्रह किया लेकिन 'दलित विरोधी ये सरकार नहीं चलेगी' के नारे लगातार लगाए जाते रहे.

निलंबित सदस्यों के नाम हैं - सुभाष यादव (आरजेडी), साबिर अली (लोक जनशक्ति पार्टी), वीरपाल सिंह यादव, नंद किशोर यादव, समाजवादी पार्टी के आमिर आलम ख़ान और कमाल अख़तर, एजाज़ अली( जदयू)

इन्हें निलंबित किए जाने का प्रस्ताव सांसदीय मामलों के राज्यमंत्री पृथ्वीराज चौहान ने रखा और इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया.

इससे पहले महिला आरक्षण विधेयक का विरोध कर रहे नेता लालू यादव, मुलायम सिंह यादव और शरद यादव ने मंगलवार सुबह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलकर मुस्लिम, दलित और पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए भी आरक्षण की माँग की.

राज्यसभा में सोमवार को भी इस विधेयक पर ज़बर्दस्त झड़पें हुई थीं और फिर मतदान टल गया था. हालात यहाँ तक पहुँच गए थे कि कुछ सांसदों ने उपराष्ट्रपति के टेबल से विधेयक संबंधी कागज़ात छीन कर फेंक दिए थे.

इस विधेयक के तहत महिलाओं के लिए संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटों का आरक्षण करने का प्रावधान है.

लेकिन इसके विरोधी माँग कर रहे हैं कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत के भीतर ही मुस्लिम, दलित और पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान किया जाए.

'सभी दलों से चर्चा करें'

सोमवार को राष्ट्रीय जनता दल के लालू यादव, समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह और जनता दल (यू) के शरद यादव प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिले.

शरद यादव ने मीडिया को बताया, "इस विधेयक में मुस्लिम, पिछड़े और दलित वर्ग की महिलाओं का भी प्रतिनिधित्व होना चाहिए. इसके लिए सभी दलों से बाचतीत होनी चाहिए. हम प्रधानमंत्री का धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने हमें बुलाया और हमारी बात सुनी है."

राष्ट्रीय जनता दल के लालू यादव का कहना था, "इस बारे में कि प्रतिनिधित्व कितना हो, कोई बात नहीं हुई है. कोई प्रतिशत तय नहीं हुआ है. हम महिलाओं को आरक्षण दिए जाने के विरोधी नहीं हैं. हम केवल मुस्लिम, पिछड़ा और दलित वर्ग की महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व दिए जाने के हक़ में हैं. ऐसा न होना कोई मामूली बात नहीं है. सभी पार्टियों के नेताओं को बुलाएँ, ऑल पार्टी मीटिंग होनी चाहिए."

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस, भाजपा और वामदलों ने इस बारे में अपने सांसदों को व्हिप जारी किया है.

उधर विधेयक का समर्थन कर रही भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस की आलोचना की है और कहा है कि सत्तारुढ़ पार्टी विधेयक पारित ही नहीं करवाना चाहती है.

विधेयक का समर्थन कर रहे वाम दलों ने भी सरकार के रवैए की आलोचना करते हुए कहा है कि सरकार के पास संख्या बल है लेकिन उनके पास विधेयक पारित करवाने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव है.

महिला विधेयक को लेकर इस तरह का विरोध पहली बार नहीं हुआ है. पिछले 13 वर्षों में जब कभी संसद में यह विधेयक आया है तो इसके विरोधियों राजद, सपा और जद (यू) के सांसदों ने काफ़ी उग्र प्रदर्शन किया है और विधेयक की प्रतियां फाड़ी थीं.

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