समन ने बढ़ाई मोदी की मुश्किल

मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी
Image caption मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर दंगों से जुडा़ कोई मामला दर्ज नहीं है

गुजरात दंगों से जुड़े कई मामलों की जांच कर रहे विशेष जाँच दल (एसआईटी) ने राज्य के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को दंगों से जुड़े एक मामले में पूछताछ के लिए बुलाया है.

विशेष जाँच दल ने मुख्यमंत्री को 21 मार्च को एसआईटी के सामने हाज़िर होने को कहा है.

गुजरात सरकार ने इस पर दी गई प्रतिक्रिया में ये स्पष्ट नहीं किया कि मुख्यमंत्री एसआईटी के सवालों का जवाब देंगे या नहीं.

राज्य सरकार के प्रवक्ता जयनारायण व्यास ने बीबीसी से कहा, "ये एक प्रक्रिया है. जहां तक भाजपा की गुजरात सरकार का सवाल है, हमने हमेशा क़ानून के साथ सहयोग किया है. ये एक न्यायिक प्रक्रिया है और जो लाज़िमी होगा किया जाएगा."

एसआईटी के प्रमुख आरके राघवन ने मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को समन जारी करने की पुष्टि की है और कहा कि इसके बारे में मुख्यमंत्री को जानकारी मिल गई है.

नरेंद्र मोदी को पहली बार दंगों से जुड़े किसी मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया है.

राघवन ने बीबीसी को बताया,"एसआईटी ने मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को गुलबर्ग सोसाइटी के मामले में नोटिस जारी किया और हमने उन्हें 21 मार्च को बुलाया है. पूछताछ की रिपोर्ट हम सुप्रीम कोर्ट को भेज देंगे."

मां-बेटे का बयान

एसआईटी के ज़रिय नोटिस जारी किए जाने के बाद एहसान जाफ़री के बेटे तनवीर जाफ़री ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "जो सबूत हमारे पास हैं, जिनके आधार पर मेरी माँ ने अदालत का दरवाज़ा खटकटाया है. मेरी मांग यही है कि मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की जाए."

जब उन से पूछा गया कि क्या कार्रवाई अपने अंजाम तक पहुंचेगी तो उनका कहना था, "एसआईटी का मौजूदा समन केवल एक शुरुआत है, क्योंकि मुख्यमंत्री का दंगों में अहम रोल था. लेकिन यह इस बात का प्रमाण है कि एसआईटी को लगाता है कि हमने जो सबूत दिए हैं उनमें सच्चाई है."

एहसान जाफ़री की विधवा ज़किया नसीम एहसान ने एसआईटी के फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा, "मुझे उम्मीद है कि हमें इंसाफ़ मिलेगा. अल्लाह से, देश की अदालत से और यहाँ के अवाम से इंसाफ़ का यक़ीन है."

हालाँकि ज़किया ने कहा कि उन्हें कम ही उम्मीद है कि मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी एसआईटी के सामने हाज़िर होंगे.

ज़किया का कहना था कि आठ साल बाद ही सही नरेंद्र मोदी को समन मिला है तो इससे उन्हें ख़ुशी है और इंसाफ पाने के लिए वो अपनी कोशिश जारी रखेंगी.

मामला

Image caption गुजरात दंगों में एक हज़ार से अधिक लोग मारे गए थे

दंगों के दौरान अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसाइटी में कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफ़री समेत 69 लोगों की हत्या की गई थी. सोसाइटी में उपद्रवियों ने आग दिया था और हमले किए थे.

एसआईटी ने यह आदेश पूर्व सांसद एहसान जाफ़री की पत्नी ज़किया नसीम एहसान और सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड की याचिका पर दिया है.

गुजरात में वर्ष 2002 में हुए दंगों में एक हज़ार से अधिक लोग मारे गए थे और इनमें अधिकतर मुसलमान थे.

ये दंगे गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में आग लगने के कारण 59 हिंदुओं के मारे जाने के बाद भड़के थे.

वर्ष 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि एसआईटी का गठन किया था और कहा था कि टीम तीन महीने के अंदर शिकायत की जाँच कर के अपनी रिपोर्ट दे.

गुजरात हाईकोर्ट ने कहा था कि एसआईटी जब चाहे मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल-जवाब कर सकता है.

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