महिला विधेयक पर सरकार सभी की राय लेगी

  • 11 मार्च 2010

महिला आरक्षण विधेयक को लेकर लोकसभा में चल रहा बवाल तब जाकर थमा जब लोकसभा में सत्ता पक्ष के नेता और वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने यह आश्वासन दिया कि सभी दलों से चर्चा के बाद ही लोकसभा में यह विधेयक लाया जाएगा.

इस विधेयक के वर्तमान स्वरुप का विरोध कर रहे समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव, जनता दल युनाइटेड के नेता शरद यादव और राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव से चर्चा के दौरान वित्तमंत्री ने यह आश्वासन दिया.

इसके बाद लोकसभा में कार्यवाही सुचारू रूप से चल सकी और बजट पर चर्चा शुरु हुई.

इससे पहले प्रणब मुखर्जी ने इससे पहले लोकसभा में आश्वासन दिया था कि सरकार विधेयक के सभी पहलुओं पर चर्चा के लिए तैयार है लेकिन इससे इसके बावजूद हो हल्ला जारी रहा.

सदन की कार्रवाई दो बार स्थगित करनी पड़ी.

आश्वासन

लगातार दूसरे दिन हो रहे हंगामे के बाद वित्तमंत्री मुखर्जी ने मुलायम सिंह यादव, शरद यादव और लालू प्रसाद यादव से चर्चा की.

इस बैठक में यूपीए के घटक दलों के नेता भी शामिल हुए. इनमें तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बैनर्जी, एनसीपी के नेता शरद यादव और डीएमके नेता टीआर बालू थे.

इस बैठक के बाद सदन में प्रणब मुखर्जी ने लोकसभा में दिए गए अपने बयान में कहा, "नेता आश्वासन चाहते थे कि लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक को लाए जाने से पहले सभी से चर्चा की जाएगी और सरकार इसका आश्वासन देती है."

उन्होंने कहा, "मैं समझता हूँ कि इस आश्वासन से सदन के सभी नेता संतुष्ट होंगे और सदन की कार्यवाही ठीक तरह से चल सकेगी."

और हुआ भी ऐसा ही और इसके बाद बजट पर चर्चा शुरु हो सकी.

मतभेद

मुलायम सिंह यादव, शरद यादव और लालू प्रसाद यादव तीनों चाहते हैं कि इस विधेयक में पिछड़ी, दलित और मुसलमान महिलाओं को आरक्षण मिले.

लालू यादव ने कहा कि कांग्रेस को इस विधेयक पर आंसू बहाना होगा. उन्होंने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस में इसे लेकर मतभेद है.

समाजवादी पार्टी के मुलयाम सिंह यादव ने राज्यसभा से सांसदों को निकाले जाने के तरीक़े पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की.

शरद यादव ने इस मामले में सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें आश्वासन दिया था कि इस पर सहमति बनाई जाएगी.

पिछले दिनों शोर-शराबे के बीच राज्यसभा से महिला आरक्षण विधेयक पारित हो गया था.

लेकिन अब इसे लोकसभा में पेश किया जाना है.

संविधान संशोधन विधेयक होने की वजह से दोनों सदनों से पारित होने के बाद इसे लालू करवाने के लिए देश की आधी से अधिक विधानसभाओं से पारित करवाना होगा.

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