महिलाओं को स्थाई कमीशन

सेना
Image caption भारतीय सेना में पुरुषों की ही स्थाई कमीशन मिलता रहा है

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम फ़ैसले में कहा है कि सरकार सेना में महिलाओं को स्थाई कमीशन दे.

सेना में कार्यरत और सेवानिवृत्त हो चुकीं कुछ महिला अधिकारियों की याचिका पर यह फ़ैसला सुनाया गया है.

जस्टिस एसके कॉल और एमपी गर्ग की खंडपीठ ने कहा कि सेना उन महिला अफ़सरों को दोबारा नौकरी पर रखे जिन्होंने स्थाई कमीशन के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था.

महिला अफ़सरों की वकील रेखा पाली ने बीबीसी संवाददाता वंदना से बातचीत में कहा, "महिलाओं के लिए इस फ़ैसले की बहुत अहमियत है. अब पुरुषों की तरह महिलाओं को भी वायुसेना और थलसेना में स्थाई तौर पर रखा जाएगा. महिला अफ़सरों को पेंशन का फ़ायदा मिला पाएगा. अब तक तो 14 साल बाद ही महिलाएँ रिटायर हो जाती थीं जबकि पेंशन के लिए 20 साल की नौकरी चाहिए होती है."

हालांकि याचिकाकर्ताओं में नौसेना के प्रतिनिधि नहीं थे लेकिन क़ानूनविदों का कहना है कि यह आदेश सेना के तीनों अंगों के लिए लागू होगा.

फ़ैसला

महिला अफ़सरों के एक गुट ने पिछले साल अदालत में याचिका दायर की थी और सेना में काम करने वाले पुरुषों की तरह महिला अधिकारियों को भी स्थाई कमीशन देने की मांग की थी.

रेख पाली ने बताया है कि कोर्ट ने कहा है कि जो महिलाएँ पिछले कुछ समय में रिटायर हुई हैं उन्हें नए फ़ैसले का फ़ायदा दिया जाएगा.

वे कहती हैं, "महिला अफ़सरों का पहला बैच 2008 या 2009 में गया है और ये फ़ैसला वहीं से लागू होगा."

अदालत ने 14 दिसंबर को इस मामले में अपना फ़ैसला सुरक्षित रखा था.

वतर्मान नियमों के अनुसार ज़्यादातर महिलाएँ केवल 14 साल तक सेना में काम कर सकती हैं. इस कारण उन्हें पेंशन और दूसरे फ़ायदे नहीं मिल पाते.

महिलाओं को सेना में अभी केवल 'शॉर्ट सर्विस कमीशन' के तहत भर्ती किया जाता है जबकि पुरुष पाँच साल के बाद स्थाई कमीशन के लिए आवेदन दे सकते हैं.

दिल्ली हाईकोर्ट के फ़ैसले से सेना में काम करने वाली महिलाओं के सामने नए अवसर खुल जाएँगे.

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