महारैली में माया का शक्ति प्रदर्शन

  • 15 मार्च 2010
बसपा रैली

उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ दल बहुजन समाज पार्टी ने आज राजधानी लखनऊ में एक बड़ी रैली की और इसको नाम दिया गया महारैली.

वैसे तो ये रैली पार्टी की स्थापना के 25 साल पूरे होने और बसपा के संस्थापक कांशीराम के जन्मदिन के मौक़े पर आयोजित की गई.

लेकिन रैली की चर्चा की वजह इस पर होने वाला भारी भरकम ख़र्च और कई दिनों से की जा रही तैयारियाँ हैं.

विरोधी दलों का आरोप है कि रैली की तैयारियों में न सिर्फ़ पूरा सरकारी महकमा जी- जान से लगा रहा बल्कि सरकारी ख़जाने का करोड़ों रुपया इसमें पानी की तरह बहाया गया.

वैसे अभी हफ़्ते भर पहले ही प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने कुंडा में एक आश्रम में मची भगदड़ में मरने वालों को कोई भी मुआवज़ा न देने की अपनी मजबूरी ये कहते हुए बयान की थी कि राज्य सरकार आर्थिक तंगी से गुज़र रही है.

बहरहाल रैली की सफलता के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी गई. इसमें कोई भी बाधा आड़े नहीं आई, चाहे वो आर्थिक तंगी हो, विपक्षी दलों की बयानबाज़ी हो या फिर उच्च न्यायालय में दाखिल की गई जनहित याचिका.

आरोप-प्रत्यारोप

इस बारे में कोई आधिकारिक आँकड़ा तो नहीं है, लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि इसमें क़रीब 200 करोड़ रुपए ख़र्च हुए हैं.

बहुजन समाज पार्टी की ओर से महामंत्री बाबू सिंह कुशवाहा ने तमाम आरोपों का खंडन किया है और उन्होंने कहा है कि रैली में आने वाले लोगों की सुविधाओं का ख़र्च पार्टी ने उठाया है.

लेकिन कांग्रेस ने कहा है कि ये रैली सर्कस है और मुख्यमंत्री मायावती इसकी रिंग मास्टर हैं.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी ने लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत में कहा, "इस रैली का मक़सद दलितों, ग़रीबों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों का कल्याण नहीं है. ये तो प्रदेश के मतदाताओं को ये संदेश देने की कोशिश है कि स्थिति नियंत्रण में है, हालाँकि बसपा का आधार खिसक रहा है."

उन्होंने आरोप लगाया कि महारैली को लेकर सरकारी कोष का दुरुपयोग हो रहा है और सरकारी तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है.

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