जम्मू कश्मीर विधान सभा में बवाल

उमर अब्दुल्लाह (फा़इल फ़ोटो)
Image caption दो विधायकों की मांग थी कि अंतर ज़िला भर्ती को बंद किया जाए

भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर विधान सभा में बुधवार को अंतर ज़िला भर्ती के मुद्दे पर भारी हंगामा हुआ है और विधानसभा अध्यक्ष ने हंगामा करने वाले दो सदस्यों को मार्शल के ज़रिए बाहर निकाल दिया.

दूसरी ओर 1947 देश विभाजन के समय कश्मीर आए पाकिस्तानी शरणार्थियों को नागरिकता के मुद्दे पर विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने विधान सभा का वॉकआउट किया.

भारतीय जनता पार्टी इन शरणार्थियों को नागरिकता दिए जाने की माँग कर रही है.

विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के विधायक अब्दुल हक़ ख़ान और निर्दलीय अब्दुल रशीद ने विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान माँग उठाई कि अंतर ज़िला भर्ती को बंद किया जाए. उनका कहना था कि ये व्यवस्था दूरदराज़ और पिछड़े इलाक़ों में रह रहे लोगों के ख़िलाफ़ है.

हालाँकि विधानसभा अध्यक्ष मोहम्मद अकबर लोन का कहना था कि ये विधेयक पहले ही विधान सभा में पेश किया जा चुका है और इसे चयन समिति के पास भेजा जा चुका है और जब इसे बहस के लिए सदन में रखा जाएगा तो इस मुद्दे पर विस्तार से बात हो सकेगी.

ग़ौरतलब है कि अंतर ज़िला भर्ती की शुरुआत कांग्रेस सरकार के समय वर्ष 2006 में की गई थी. इससे पहले राज्य में ज़िले के अंदर ही भर्ती का प्रवाधान था.

हंगामा

विधानसभा अध्यक्ष के आश्वासन के बाद भी जब दोनों सदस्य अपनी सीटों पर नहीं आए और अंतर ज़िला भर्ती को बंद करने को लेकर हंगामा करते रहे तो स्पीकर ने मार्शल को आदेश देकर उन्हें बाहर निकाल दिया.

मोहम्मद अकबर लोन ने मीडिया से कहा, "मैं प्रश्नकाल को इस तरह से बाधित नहीं होने दे सकता. सदन की कार्यवाही सुचारू रुप से चले, इसलिए दोनों सदस्यों को बाहर निकाला गया."

अब्दुल हक़ ख़ान का कहना था कि ये मुद्दा बहुत ही महत्वपूर्ण है और इसका प्रभाव उन लोगों पर पड़ रहा है जो दूर दराज़ इलाक़ों में रहते हैं.

दोनों सदस्यों का कहना था, "इससे राज्य के पिछड़े और दूर दराज़ के पहाड़ी इलाक़ों के लोगों को नुक़सान हो रहा है. नौजवानों को नौकरी नहीं मिल रही है इसलिए वो चरमपंथी गुटों से जुड़ने को मजबूर हो रहे हैं."

दूसरी ओर भाजपा के 11 विधायकों ने 1947 में देश विभाजन और भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय जम्मू-कश्मीर आए पाकिस्तानी शरणार्थियों को नागरिकता के मुद्दे पर विधान सभा से वॉकआउट किया.

लगभग तीन लाख पाकिस्तानी शरणार्थी जम्मू कश्मीर में रहते हैं लेकिन उन्हें राज्य की नागरिकता नहीं है. पिछले दिनों जब वे लोग नागरिकता की मांग कर रहे थे तो उनपर लाठी चार्ज किया गया था.

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