देश में समान टोल टैक्स प्रणाली: कमलनाथ

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भारत के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री कमलनाथ का कहना है कि वर्ष 2010 के अंत तक पूरे देश में एक समान टोल टैक्स प्रणाली और नेशनल परमिट की व्यवस्था लागू हो जाएगी.

कब कहाँ होगी बीबीसी की टीम

वाराणसी (21-22 मार्च)

सासाराम/औरंगाबाद/गया (23-25मार्च)

धनबाद (26-27 मार्च)

सिंगुर-कोलकाता (28-30 मार्च)

चेन्नई (31 मार्च- दो अप्रैल)

बंगलौर (तीन-चार अप्रैल)

चित्रदुर्ग (पाँच अप्रैल)

हुबली (छह अप्रैल)

पुणे (सात अप्रैल)

मुंबई (आठ-नौ अप्रैल)

'हाइवे हिंदुस्तान' के लिए बीबीसी से हुई विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों से गुज़रने को यह व्यवस्था आसान बना देगी.

उन्होंने बताया, "सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय एक समान टोल टेक्नोलॉजी और राष्ट्रीय परमिट की योजना पूरे देश में लागू करने जा रहा है. इसके लागू होने के बाद लोग बिना किसी बाधा के यात्रा कर सकेंगे."

कमलनाथ ने जून 2010 से हर दिन 20 किलोमीटर सड़क प्रतिदिन बनाने का लक्ष्य रखा है.

मौजूदा दौर में इसे दुनिया भर की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक माना जा रहा है.

हालांकि कुछ विशेषज्ञ इस लक्ष्य को अतिमहत्वाकांक्षी मानते हैं और कहते हैं कि इसके लिए जो तैयारी होनी चाहिए वह अभी नहीं है.

हाइवे हिंदुस्तान के ज़रिए बीबीसी संवाददाताओं की एक टीम यह जानने की कोशिश कर रही है कि भारत में सड़क निर्माण ने अब तक लोगों पर किस तरह का प्रभाव डाला है.

बुनियादी ढाँचा

यह पूछे जाने पर कि हर रोज 20 किलोमीटर सड़क बनाने का ऐलान कहीं ज्यादा महत्वाकांक्षी ऐलान तो नहीं, कमलनाथ कहते हैं, "मैंने काफ़ी सोच कर यह बात कही थी. कार्य ऐसा होना चाहिए जिसके परिणाम लोगों को दिखे, जिसका अर्थ समझ में आए. 20 किलोमीटर प्रतिदिन का मतलब है 7,000 किलोमीटर हर साल. बुनियादी ढांचे की कमी को दूर करने के लिए जरूरी है कि यही हमारा लक्ष्य हो."

उन्होंने कहा, "जिस तरह का दबाव हमारे बुनियादी ढाँचे पर है, उसमें ऐसे ही लक्ष्य की ज़रुरत है."

निवेश उस क्षेत्र में होते हैं जहां जोखिम कम होता है. हमारे पास ट्रैफिक की कोई कमी नहीं है. लोग अब अच्छी सड़कों के लिए टोल टैक्स चुकाने के लिए तैयार हैं. आज मुझे निवेश को लेकर कोई चिंता नहीं है

कमलनाथ

हर रोज 20 किलोमीटर सड़क बनाने के लक्ष्य पर कुल मिलाकर लगभग एक लाख करोड़ रुपए खर्च होंगे. इतनी विशाल परियोजना को संभालने के लिए क्या तंत्र तैयार है, सवाल पर वे कहते हैं कि सात हज़ार किलोमीटर प्रतिवर्ष सड़क बनाने के लिए हर वक़्त दो लाख करोड़ की धनराशि की ज़रुरत होगी और प्रशासन इसके लिए अपनी क्षमता बढ़ा रहा है.

उनका कहना है, ‘‘ज़रूरी है कि पहले हम अपनी क्षमता बढ़ाएं. इस दिशा में हमने क़दम बढ़ाया है और काफ़ी आगे भी बढ़े हैं.’’

इस धन राशि के इंतज़ाम के सवाल पर वे कहते हैं कि इस क्षेत्र में निजी निवेश की कोई कमी नहीं है.

उनका मानना है कि निवेश के लिए विश्वास के माहौल की ज़रुरत होती है. और इस समय देश में विश्वास का माहौल है.

वे कहते हैं, ‘‘निवेश उस क्षेत्र में होते हैं जहां जोखिम कम होता है. हमारे पास ट्रैफिक की कोई कमी नहीं है. लोग अब अच्छी सड़कों के लिए टोल टैक्स चुकाने के लिए तैयार हैं. आज मुझे निवेश को लेकर कोई चिंता नहीं है.’’

अब भी भारत और इंडिया में काफी फर्क है, क्या इन सड़कों से उनमें टकराव की स्थिति नहीं बन जाएगी?

कमलनाथ कहते हैं, ‘‘ इन दोनों में टकराव न हो, इसीलिए सड़कें जरूरी हैं. सड़कें बनने से उन क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधि बढ़ती हैं जहां पर कोई विकास नहीं हुआ है. विकास और प्रगति के लिए जरूरी है कि इन इलाकों में आर्थिक गतिविधि की शुरुआत हो. आर्थिक गतिविधि सड़कों से शुरू होती है. ’’

वे मानते हैं कि सड़कों से आर्थिक खाई पटेगी.

नेशनल परमिट

भारत में ट्रक ड्राइवरों की एक आम शिकायत होती है कि देश के 28 राज्यों से गुज़रना 28 देशों से गुजरने के बराबर लगता है.

ढेर सारी कागज़ी कार्रवाई और भ्रष्टाचार की वजह से उत्पादकता में कमी के सवाल पर कमलनाथ स्वीकार करते हैं कि काफी बाधाएं हैं.

उनका कहना है कि इस समस्या को दूर करने के लिए हाल ही में उन्होंने राज्य परिवहन के मंत्रियों के साथ एक बैठक की थी.

उन्होंने बताया, "सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय एक समान टोल टेक्नोलॉजी और राष्ट्रीय परमिट की योजना पूरे देश में लागू करने जा रहा है. इसके लागू होने के बाद लोग बिना किसी बाधा के यात्रा कर सकेंगे."

उनका कहना है कि व्यवस्था इस साल के आख़िर तक लागू हो जाएगी.

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