नहीं पेश हुए मोदी, कांग्रेस नाराज़

  • 21 मार्च 2010
नरेंद्र मोदी
Image caption नरेंद्र मोदी को एसआईटी ने समन जारी किया था

आख़िरकार नरेंद्र मोदी गुजरात दंगों की जाँच कर रहे विशेष जाँच दल (एसआईटी) के सामने पेश नहीं हुए.

वर्ष 2002 में हुए गुजरात दंगों के दौरान गुलबर्ग सोसाइटी में हुई हिंसा के मामले में एसआईटी ने मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को रविवार को पेश होने के लिए समन भेजा था.

लेकिन नरेंद्र मोदी नहीं आए. कांग्रेस ने इस मामले पर नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लिया है और कहा है कि उनका एसआईटी के सामने पेश न होना अवमानना है.

कांग्रेस ने कहा कि इससे यह भी पता चलता है कि मोदी छिपे रहना चाहते हैं.

नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "नरेंद्र मोदी को पेश होने के लिए एसआईटी का समन ये बताता है कि ये मामला कितना महत्वपूर्ण और गंभीर है. किसी भी कारण मोदी का एसआईटी के सामने पेश न होना ये बताता है कि वे छिपे रहना पसंद करते हैं."

गुजरात दंगों के दौरान गुलबर्ग सोसाइटी में हुई हिंसा में कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफ़री मारे गए थे. उनकी पत्नी जकिया जाफ़री की शिकायत पर मुख्यमंत्री मोदी को समन जारी हुआ है.

पिछले साल 27 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को निर्देश दिया था कि वह जकिया जाफ़री की शिकायत की जाँच करें.

आरोप

जकिया जाफ़री ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री मोदी और 62 अन्य लोगों ने गुजरात में हुई हिंसा में सहायता की और उसे बढ़ावा दिया. गुजरात दंगों में एक हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

Image caption वर्ष 2002 में हुए गुजरात दंगे में एक हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे

गुजरात दंगों के दौरान फरवरी 2002 में गुलबर्ग सोसाइटी पर भी हमला हुआ था, जिसमें एहसान जाफ़री समेत 70 लोग मारे गए थे.

गुजरात में वर्ष 2002 में हुए दंगों में एक हज़ार से अधिक लोग मारे गए थे और इनमें अधिकतर मुसलमान थे.

ये दंगे गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में आग लगने के कारण 59 हिंदुओं के मारे जाने के बाद भड़के थे.

वर्ष 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि एसआईटी का गठन किया था और कहा था कि टीम तीन महीने के अंदर शिकायत की जाँच कर के अपनी रिपोर्ट दे.

गुजरात हाईकोर्ट ने कहा था कि एसआईटी जब चाहे मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल-जवाब कर सकता है.

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