मुस्लिम महिलाओं ने उठाई आवाज़

मुस्लिम महिलाओं का प्रदर्शन
Image caption जावेद अख्तर ने कहा कि जो लोग मुस्लिम महिलाओं की बदहाली के लिए जिम्मेदार हैं, आज वही संसद में मुस्लिम महिलाओं के लिए आरक्षण मांग रहे हैं.

गीतकार और राज्य सभा में मनोनीत जावेद अख्तर ने कहा है कि महिला आरक्षण बिल को अब कोई भी नहीं रोक सकता है, यह ठीक इसी तरह है जैसे सुबह को होने से कोई रोक नहीं सकता, वक़्त को गुज़रने से कोई रोक नही सकता या मौसम को बदलने से रोका नही जा सकता.

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुस्लिम महिलाओं ने शनिवार को प्रदर्शन किया. इसका आयोजन भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की दिल्ली इकाई की ओर से किया गया था.

इस प्रदर्शन में हाल में राज्य सभा में पारित महिला आरक्षण विधेयक को सही ठहराया गया.

प्रदर्शन में कई मुस्लिम महिला बुद्धिजीवियों ने भाग लिया.

जावेद अख्तर ने इस मौके पर पहुँचकर महिलाओं की हौसला अफजाई की.

जावेद अख्तर ने कहा, “दुनिया के बावन मुस्लिम मुल्कों में से पचास मुल्कों में तलाक़—तलाक़ कहने पर तलाक़ नहीं हो जाता. यह भारत ही है जहां यह प्रथा जारी है जिसे मौलवी-मुल्लाओं की सरपरस्ती हासिल है.’’

उन्होंने ज़ोर दिया कि जो लोग मुस्लिम महिलाओं की बदहाली के ज़िम्मेदार हैं, आज वही संसद में मुस्लिम महिलाओ के लिए आरक्षण मांग रहे हैं. मतलब साफ है-विधेयक के पारित होने में वे रुकावट डालना चाहते हैं.

जावेद अख्तर ने कहा, ‘‘ये वही लोग हैं जो चाहते हैं कि मुस्लिम महिलाएं घर से न निकलें और पर्दे में रहें. दरअसल उनकी इस मांग से खुद उनके चेहरे का नकाब उठ गया है.’’

विरोध

राज्य सभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित होने के बाद मुस्लिम पसर्नल लॉ बोर्ड और शियाओं के रहनुमा कल्बे जव्वाद की तरफ से उसके विरोध में आवाज़ें उठने लगी थीं.

कल्बे जव्वाद ने तो यहां तक कहा कि मुस्लिम महिला का काम घर से निकलना नहीं, बल्कि घर में रहकर अच्छी नस्ल के बच्चे पैदा करना है.

अनहद की कार्यकर्ता शबनम हाश्मी ने इसके जवाब में कहा, “शाहबानो के मामले में औरतों की लड़ाई मर्दों ने अपने हाथ में लेकर महिलाओं को नुक़सान पहुंचाया था. अब औरतें अपनी लड़ाई ख़ुद लड़ेंगी और उसे अंजाम तक पहुचाएंगी.”

शबनम हाश्मी ने जानकारी दी कि आंदोलन एक साथ गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश में भी चल रहा है. इसी तरह की रैलियां लखनऊ, मुंबई, पटना और हैदराबाद में भी की जाएंगी.

अहमदाबाद में ऐसी ही एक रैली आयोजित की गई थी.

मिसाल

Image caption महिलाओं ने इस प्रदर्शन में पूरे जोश से भाग लिया.

मुंबई में मुस्लिम अधिकारों के लिए लड़ने वाले जावेद आनंद ने कहा, “पाकिस्तान और बांग्लादेश हमारे लिए बेहतरीन मिसालें हैं. दोनों मुल्कों में मुस्लिम बहुमत में हैं. वहां मर्दों और औरतों ने मिलकर महिलाओं को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बिठाया है. मौलवी-मुल्ला वहां पर भी आग तो उगलते हैं लेकिन कभी सत्ता में नहीं आते.’’

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि भारत जैसे लोकतंत्र में महिलाओं को कैसे पीछे रखा जो सकता है?

जावेद आनंद ने महिलाओं के पक्ष में ईरान और मिस्र के उदाहरण भी दिए. उन्होंने ईरान की मिसाल दी जो एक कट्टर इस्लामी देश है. लेकिन वहां के संसद में महिलाओं की कमी नहीं है.

हालांकि इस रैली में महिलाओं की संख्या ज़्यादा नहीं थी लेकिन जो मौजूद थीं उनमें जोश की कोई कमी नहीं थी.

शायर और अनहद कार्यकर्ता गौहर रज़ा ने महिलाओं को यकीन दिलाया कि वो इस लड़ाई में अकेली नहीं हैं. समाज के अन्य तबके भी उनके साथ हैं.

उन्होंने वैज्ञानिकों, सामाजिक वैज्ञानिकों, अन्य बुद्घजीवियों और मीडिया से महिलाओं का साथ देने की अपील की.

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