तृणमूल सांसद ने अपनी ही पार्टी को कोसा

ममता बनर्जी
Image caption सुमन कबीर ने इससे पहले भी पार्टी में रहते हुए तृणमूल कांग्रेस से अलग लाइन ली है

पश्चिम बंगाल से तृणमूल कांग्रेस के सांसद और लोकप्रिय गायक कबीर सुमन ने अपनी ही पार्टी पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने और क़त्ल कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं.

कबीर सुमन ने ये आरोप रविवार को एक बंगाली टेलीविज़न चैनल के साथ बातचीत के दौरान लगाए.

तृणमूल कांग्रेस की मुखिया और भारतीय रेल मंत्री ममता बनर्जी ने फ़िलहाल कबीर सुमन के आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन ममता के क़रीबियों के अनुसार रेल मंत्री सुमन के आरोपों से आहत हैं.

कबीर सुमन ने टेलीविज़न पर कहा, "मार्क्सवादियों पर हम जो आरोप लगाते हैं, तृणमूल कांग्रेस भी वही सब करती है. पंचायत स्तर पर मेरी पार्टी में व्यापक भ्रष्टाचार है जिसकी रिपोर्ट मुझे लगातार मिलती रहती है. वहां रिश्वत के बिना कुछ नहीं हो सकता."

उन्होंने आगे कहा, "मार्क्सवादियों ने लंबे समय तक लोगों को मारा है, वही सब मेरी पार्टी तृणमूल कांग्रेस कर रही है."

लेकिन इससे संबंधित उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी, और तब से ही वो इंटरव्यू देने से बच रहे है.

पहले भी आलोचक रहे

कबीर सुमन इससे पहले भी पार्टी की फजीहत करवा चुके है. उन्होंने माओवादियों के ख़िलाफ़ ऑपरेशन ग्रीनहंट की सख़्त आलोचना की थी, जिससे ममता बनर्जी को शर्मिंदगी झेलनी पड़ी थी.

उसके बाद उन्होंने एक सीडी (कॉंपैक्ट डिस्क) जारी की थी जिसमें माओवादी समर्थक नेता छत्रधर महतो की तारीफ़ वाले गाने थे. महतो इस समय जेल में बंद हैं.

सुमन ने सकार और माओवादियों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की भी पहल की थी, जिसके बाद ममता बनर्जी ने कबीर सुमन से किनारा करते हुए उन्हें पार्टी में मेहमान बताया था.

लेकिन बाद में माना जाता है कि लेखिका महाश्वेता देवी ने ममता बनर्जी और कबीर सुमन के बीच सुलह करवाई थी.

लेकिन सुमन ने एक और विवाद को हवा दी जब उन्होंने कहा कि जिन बुद्धिजीवियों ने सिंगूर और नंदीग्राम में पार्टी का साथ दिया था वो अब पार्टी से मुहं मोड़ सकते है क्योकि "पार्टी जनता से दूर होती जा रही है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है."

सिंगूर और नंदीग्राम में ज़मीन के अधिग्रहण का विरोध कर तृणमूल कांग्रेस जनता का भरोसा जीतने में कामयाब रही थी. इस आंदोलन के बाद ही तृणमूल कांग्रेस ने राज्य में हुए पंचायत और लोकसभा के चुनावों में बेहतरीन प्रदर्शन किया था.

टीकाकारों की राय में अब पार्टी को उम्मीद है कि वो 2011 में होने वाले विधानसभा के चुनावों में भी ये नतीजे दोहरा सकती है.

पश्चिम बंगाल में 1978 से लगातार मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी गठबंधन की सरकार है, लेकिन पिछले चुनावों में उनका प्रदर्शन काफ़ी ख़राब रहा था.

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