सुप्रीम कोर्ट ने खनन पर रोक लगाई

  • 22 मार्च 2010
खदान
Image caption ओएमसी पर आरोप है कि उसने पट्टे से अधिक क्षेत्र में खनन किया है

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने ओबलापुरम माइनिंग कंपनी (ओएमसी) के बेल्लारी संरक्षित खदानों में जारी सभी खनन कार्यों पर रोक लगा दी है.

यह कंपनी कर्नाटक सरकार में मंत्री गाली जनार्दन रेड्डी की है.

सोमवार को मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन और दीपक वर्मा की खंडपीठ ने सर्वे ऑफ़ इंडिया के नेतृत्व में एक विशेज्ञ समिति का गठन किया है.

विशेषज्ञ समिति खनन के क्षेत्रों की समीक्षा के साथ-साथ ओएमसी पर लगे आरोपों की जांच भी करेगी.

ओएमसी पर आरोप है कि उसने बेल्लारी संरक्षित वन क्षेत्र में पट्टे से अधिक इलाक़े में खनन किया और दूसरी कंपनियों को आवंटित जगहों पर भी क़ब्ज़ा किया है.

खनन पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने विशेषज्ञ समिति को अपनी जांच रिपोर्ट देने के लिए दो हफ़्ते का समय दिया है और यह भी कहा कि अगले आदेश तक उन इलाक़ों में खनन का कार्य बंद रहेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश सरकारी की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिक के संबंध में रेड्डी बंधुओं यानी गाली जनार्दन रेड्डी और उनके भाई करुणाकरण रेड्डी को नोटिस जारी किया है.

राज्य सरकार ने विशेष अनुमति याचिका में हाई कोर्ट के उस फ़ैसले को चुनौती दी थी जिसमें हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के खनन पर रोक लगाने के फ़ैसले को रद्द कर दिया था.

सोमवार को अटर्नी जनरल जीई वाहनवती ने सुप्रीम कोर्ट में वो रिपोर्ट भी सौंपी जिसमें हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ज़रिए बनाई गई केंद्रीय अधिकृत समिति और राज्य सरकार की उच्चस्तरीय जांच समितियों के निष्कर्षों को नज़र अंदाज़ किया.

दोनों समितियों ने स्वतंत्र जांच के बाद यह कहा कहा था कि रेड्डी बंधुनों ने राज्य में संरक्षित जंगल की काफ़ी क्षेत्रों का अतिक्रमण किया है.

सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि सर्व ऑफ़ इंडिया के नेतृत्व में बनी समिति में राज्य के वन, खदान और राजस्व विभाग के सदस्य भी शामिल होंगे.

जनार्दन रेड्डी और उनकी कंपनियां गत चार वर्षों से विवादों में घिरी हुई है. कर्नाटक में गाली जनार्दन रेड्डी पर्यटन मंत्री हैं जबकि उनके भाई करुणाकरण रेड्डी राजस्व मंत्री हैं.