नैटो का हमला अब जंक फ़ूड पर

नैटो
Image caption नैटो कमांडरों का कहना है कि सैनिकों तक आवश्यक आपूर्ति पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है

अफ़ग़ानिस्तान में नैटो के सैन्य अड्डों में स्थित बर्गर और पीत्ज़ा की दुकानें बंद की जा रही हैं.

नैटो के एक प्रवक्ता के मुताबिक अफ़ग़ानिस्तान में उनके सैन्य ठिकानों के आस-पास मौजूद मौज-मस्ती की चीज़ों को हटाया जा रहा है.

और इसका उद्देश्य है युद्धक्षेत्र में सैनिकों की कार्यक्षमता बढ़ाना और लड़ाई के साज़ो-सामान के लिए अधिक जगह मुहैया कराना.

प्रवक्ता ने कहा कि संबंधित सैन्य अड्डों के अधिकारी ही फ़ैसला करेंगे कि इन्हें कब हटाना है.

बर्गर और पीट्ज़ा के दिन लदे

पिछले साल ही अफगानिस्तान में नैटो के शीर्ष कमांडर जनरल स्टैनली मैकक्रिस्टल ने स्पष्ट किया था कि नैटो के सैन्य अड्डों में बर्गर किंग और पीत्ज़ा हट जैसे आउटलेट्स के दिन अब लद चुके हैं.

उन्होंने चिंता जताई थी कि बर्गर और पीत्ज़ा के ये रेस्तरां सैनिकों का ध्यान भंग कर रहे हैं.

अफगानिस्तान के कंधार, बगराम और मज़ार-ए-शरीफ शहरों में नैटो के बड़े सैन्य अड्डे हैं.

मिशन पर ख़ास ध्यान

नैटो के प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया, “पिछले कई महीनों से हम अफ़ग़ानिस्तान में 39,000 अतिरिक्त सैनिक और सैन्य साज़ो-सामान लाने में लगे हुए थे.”

“सैनिक अब भी पीत्ज़ा और बर्गर खा सकेंगे लेकिन दुकानों की बजाय सेना की कैंटीन में.”

नैटो के एक वरिष्ठ अधिकारी मेजर माइकिल टी हॉल ने अपने ब्लॉग में लिखा, “यह लड़ाई का मैदान है न कि मौज-मस्ती का कोई पार्क.”

उन्होंने लिखा, “अतिरिक्त सैनिकों को ठहराने की व्यवस्था करने और सैन्य मिशन पर ध्यान एकाग्र करने के लिए ज़रूरी है कि कुछ ग़ैर ज़रूरी चीजों में कटौती की जाय.”

कमांडर माइकिल ने लिखा, “बगराम और कंधार जैसे बड़े सैन्य ठिकानों में ग़ैर ज़रूरी चीजों की आपूर्ति के कारण ज़रूरी चीज़ों की आपूर्ति में रूकावट आती है. दुर्गम ठिकानों में तैनात सैनिकों को रोज़मर्रा की ज़रूरत की चीज़ें मुहैया कराने वाले संसाधन कम पड़ जाते हैं.”

उन्होंने कहा, "इन आउटलेट्स को बंद करने के बाद हमें सैन्य ज़रूरतों के लिए और जगह मिल जाएगी. साथ ही इन्हे लाने में इस्तेमाल होने वाले विमानों की अनावश्यक आवाजाही में कमी आएगी".

इसके अलावा इन आउटलेट्स के संचालन में जो बिजली और पानी ख़र्च होती है उसकी भी बचत होगी.

संवाददाताओं का मानना है कि दुर्गम इलाकों में तैनात सैनिकों को तो इस क़दम से कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा लेकिन बड़े सैन्य अड्डों में 12 महीने की लंबी पोस्टिंग पर आए सैनिकों को इससे शिकायत हो सकती है.

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