लवारिस शवों का व्यापार

राजस्थान पुलिस
Image caption निचले दर्जे के पुलिस कर्मचारियों के संलिप्त होने की आशंका.

राजस्थान के गंगानगर ज़िले में लावारिस शवों को गैरक़ानूनी तरीक़े से प्राइवेट मेडिकल संस्थानों को देने का एक मामला प्रकाश में आया है.

इस मामले के प्रकाश में आने का बाद गंगानगर के पुलिस अधीक्षक उमेश दत्ता ने पिछले एक दशक में ऐसे सभी मामलो की जाँच के आदेश दिए हैं.

पुलिस अधीक्षक उमेश दत्ता का कहना था, “जब शिकायत मिली तो हमने प्रारंभिक जाँच कराई, इसमें एक दर्जन निचले दर्जे के पुलिस कर्मचारियों के स्तर पर गंभीर गड़बड़ी का पता चला है. यह देखते हुए पिछले 10 साल में जितने भी शव लावारिस मानकर दिए गए है, उनका दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से सर्वेक्षण कराने का निर्देश दिया गया है, साथ ही राज्य सरकार से भी जाँच के लिए आग्रह किया गया है”

निचले दर्जे के पुलिस कर्मचारियों ने ऐसे कितने लावारिस शवों को बिना उचित क़ानूनी प्रक्रिया के प्राइवेट मेडिकल संस्थानों को सौंपे हैं इसकी जाँच की जाएगी.

शुरुआती जाँच में एक साल में ऐसे 15 शव प्राइवेट मेडिकल संस्थानों को देने का मामला सामने आया है.

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब एक स्थानीय नागरिक ने सूचना के अधिकार तहत जानकारियां एकत्रित की और पुलिस के अधिकारियों को सूचित किया.

उमेश दत्ता कहते हैं कि लावारिस शवों को मेडिकल संस्थानों को देने का एक क़ानून है और उसकी एक प्रक्रिया है. यहाँ इसका पालन नहीं होना सामने आया है.

अभागा राहुल

यह ग़ैर क़ानूनी देह दान परदे में ही रहता अगर गंगानगर के राजकुमार सोनी अपने बेटे राहुल के गायब होने और फिर उसके शव को लावारिस मान कर एक मेडिकल संस्थान को देने के बारे में पता नहीं करते.

राहुल की पिछले वर्ष 26 मई को संदेहास्पद हालत में मौत हो गई थी और उसका शव ऐसे ही एक मेडिकल संस्थान को दे दिया गया.

राजकुमार सोनी का कहना है, “मेरे बेटे का शव पुलिस ने लावारिस मान कर मेडिकल संस्थान को दे दिया. पुलिस ने ये पता करने की कोई कोशिश नहीं की कि वो अभागा कौन है. मुझे बहुत सदमा लगा और फिर मैंने इस घोटाले का पर्दाफाश करने का बीड़ा उठाया. इस दिशा में आगे बढ़ा तो मेरी आँखे खुली की खुली रह गई, मैं इस मामले को इंसाफ़ के अंजाम तक पहुंचा कर ही दम लूँगा.”

पुलिस के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों को शव सौंपने के लिए राज्य में एक क़ानून है जिसका नाम राजस्थान एनाटोमिकल एक्ट है.

इसके तहत पुलिस अख़बारों में विज्ञापन देकर लोगों को सूचना देती है. मगर यहाँ इस क़ानून की गंभीर अवहेलना हुई है. इस क़ानून के तहत किसी एक मेडिकल कॉलेज को देह लेने के लिए अधिकृत किया जाता है लेकिन इसका पूरी तरह अनदेखा किया गया.

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