उड़ीसा लू की चपेट में, दो की मौत

उड़ीसा
Image caption उड़ीसा में वर्ष 1998 में लू से 2000 से अधिक जानें गई थी.

अभी मार्च का महीना ख़त्म भी नहीं हुआ है और उड़ीसा में गर्मी की लहर शुरू हो चुकी है. विशेष कर पश्चिमी उड़ीसा में गर्मी कि मार से लोग बेहाल होने लगे हैं. इस इलाके के 6 शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पार कर चुका है.

तपती गर्मी से एक आदमी की जान जा चुकी है. राज्य प्राकृतिक आपदा विभाग के प्रवक्ता शुभाश्री नंद ने बीबीसी को बताया कि अब तक लू से सात लोगों के मरने की ख़बर मिली थी जिनमें से एक ही सही पाया गया. यह मौत जाजपुर ज़िले में हुई.

उन्होंने कहा कि बालेश्वर ज़िले में भी एक आदमी के मरने की ख़बर आई है लेकिन अभी उसकी मेडिकल रिपोर्ट नहीं मिली है, इसलिए अभी इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती है.

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटों में पश्चिमी उड़ीसा के झारसुगुडा शहर में राज्य का सर्वाधिक तापमान रिकॉर्ड किया गया है. यहां का तापमान 42.6 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है.

पश्चिमी उड़ीसा के कुछ अन्य शहरों में सर्वाधिक तापमान दर्ज किए गए.

टिटलागढ़ में 42 डिग्री, संबलपुर में 41.5 डिग्री, बलांगीर में 40.6 डिग्री, भवानीपटना 40.5डिग्री और सुंदरगढ़ में 40 डिग्री सेल्सियस तक पारा चढ़ गया.

इन सभी शहरों का तापमान सामान्य से कम से कम 3 से 4 डिग्री अधिक हैं.

मौसम विभाग के निदेशक डॉक्टर शरत चँद्र साहू ने बीबीसी से कहा कि इस वर्ष राज्य में भीषण गर्मी पड़ने के सभी आसार अभी से नज़र आ रहे हैं. हालाँकि राज्य के तटीय इलाकों में तापमान अभी तक सामान्य है.

विडम्बना यह है कि ये मौतें तटीय इलाकों में ही हुई हैं.

पर्यावरणविद तपन पाढ़ी का कहना है कि ऐसा इसलिए होता है कि तटीय इलाकों में उमस बहुत ज्यादा होती है, जो अक्सर मौत का कारण बनती है.

गौरतलब है कि वर्ष 1998 में उड़ीसा में लू से क़रीब 2000 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई थी.

इसके बाद से लगभग हर वर्ष गर्मियों के दिनों में राज्य में दर्जनों लोगों की मौत होती आई है.

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