कश्मीर में 'हॉट समर' की चेतावनी

कश्मीर (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption कश्मीर में पिछले आठ महीनों में हिंसा की घटना में वृद्धि हुई है

भारतीय सेना का कहना है कि भारत प्रशासित कश्मीर में गर्मी के मौसम में पृथकतावादी हिंसा बढ़ने की आशंका है.

श्रीनगर में सेना के कोर मुख्यालय में तैनात ब्रिगेडियर गुरमीत सिंह के शब्दों में 'हॉट समर' आ रहा है.

उन्होंने कहा कि ऐसा आतंकवाद के हवाले से भी होगा और घुसपैठ के हवाले से भी.

भारतीय सेना ने कश्मीर घाटी के कुपवाड़ा ज़िले में पिछले हफ़्ते घुसपैठ के तीन प्रयास विफल कर दिए और आठ घुसपैठियों को मारने का दावा किया.

इन घुसपैठियों के पास से स्वचालित राइफ़लों के अलावा जीपीएस जैसे कई आधुनिक उपकरण ज़ब्त किए गए हैं.

इन संघर्षों में सेना का कोई नुक़सान नहीं हुआ. लेकिन गत वर्ष मार्च के ही महीने में कुपवाड़ा ज़िले में घुसपैठियों के साथ पाँच दिनों तक चली एक झड़प एक मेजर समेत आठ सैनिक मारे गए थे जबकि 17 चरमपंथी भी मारे गए थे.

घुसपैठ

ब्रिगेडियर गुरमीत सिंह ने कहा, "आजकल नियंत्रण रेखा के उस पार लगभग 400 चरमपंथी इस पार दाख़िल होने के लिए तैयार बैठे हैं."

उन्होंने कहा कि सेना ने इससे निपटने के लिए अच्छी तैयारी की है और सेना किसी भी चुनौती के लिए तैयार है.

ब्रिगेडियर गुरमीत सिंह ने कहा कि कश्मीर घाटी में चरमपंथियों के विरुद्ध अभियान काफ़ी प्रभावशाली रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए हुआ है कि सेना के साथ पुलिस, अर्धसैनिक बलों और गुप्तचर एजेंसियों में काफ़ी तालमेल रहा है.

कश्मीर में गत कुछ वर्षों में पृथकतावादी हिंसा इतनी घट गई थी कि लगता था जैसे हिंसा का दौर समाप्त हो गया है.

लेकिन पिछले आठ महीनों से पृथकतावादियों ने फिर से हमले शुरू किए हैं जिन्हें देखते हुए सुरक्षा अधिकारियों ने आशंका जताई है कि चरमपंथी श्रीनगर और अन्य शहरों में फिर से संगठित होने का प्रयास कर रहे हैं.

मुंबई हमलों के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर विवाद पर लगभग डेढ़ साल से बातचीत स्थगित रही है. भारत का आरोप है कि पाकिस्तान अपनी भूमि पर अब भी आतंकवाद के ढांचे को ख़त्म नहीं कर रहा है.

दूसरी ओर पाकिस्तान का आरोप है कि प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने शर्म-अल-शेख़ (मिस्र) में बातचीत को आतंकवाद के मामले से अलग रखने की जो रज़ामंदी दिखाई थी, भारत उससे मुकर गया है.

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