'हर संभव मदद की जाएगी'

आप्रवासी मामलों के मंत्री वयलार रवि
Image caption पिछले दिनों यूएई में 17 भारतीयों को मौत की सज़ा सुनाई गई थी

भारत के आप्रवासी मामलों के मंत्री वयलार रवि का कहना है कि संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई में मौत की सज़ा पाने वाले 17 भारतीयों को क़ानूनी मदद की जाएगी और फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की जाएगी.

सोमवार को यूएई में शारजाह की एक शरई अदालत ने एक पाकिस्तानी की हत्या के मामले में 17 भारतीयों को मौत की सज़ा सुनाई थी.

वायलार रवि ने यूएई की अदालत के फ़ैसले को 'चौंकाने' वाला बताया.

उनका कहना था, "एक ही समय में 17 भारतीयों को मौत की सज़ा देना चौंकाने वाला है. हमने मौत की सज़ा पाने वालों को हर संभव मदद देने का फ़ैसला किया है."

सत्रह भारतीयों पर आरोप था कि उन्होंने शराब के ग़ैर क़ानूनी कारोबार पर अपना क़ब्ज़ा जमाने के लिए एक झगड़े में एक पाकिस्तानी नागरिक की मार-मार कर हत्या कर दी थी. इस झड़प में तीन पाकिस्तानी घायल भी हुए थे.

मामला

समाचार एजेंसियों के अनुसार भारत सरकार ने दुबई स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों से कहा है कि वो अदालत के फ़ैसले की कॉपी और मामले से जुड़े अन्य दस्तावेज़ इकट्ठा करे.

इससे पहले विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने भी सज़ा पाने वाले भारतीयों की मदद की बात कही थी.

यूएई की अदालत के फ़ैसले से भारतीयों में बेचैनी है. हालांकि यूएई में यह पहली बार अदालत की ओर से किसी एक मामले में इतने लोगों को मौत की सज़ा दी गई है.

वर्ष 2009 के जनवरी में शारजाह के अल-सजाह नामक स्थान पर भारतीयों और पाकिस्तानी नागरिकों के बीच ग़ैर क़ानूनी शाराब के धंधे को लेकर वर्चस्व की लड़ाई हुई थी.

इस लड़ाई में क़रीब 50 लोग शामिल थे लेकिन 17 को ही मौत की सज़ा सुनाई गई है, क्योंकि वे लोग लड़ाई का नेतृत्व कर रहे थे.

यूएई में शराब बेचना ग़ैर क़ानूनी है, हांलाकि बार और रेस्तरां में शराब बिकती है, लेकिन इसके लिए विशेष अनुमति लेनी होती है.

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