हैदराबाद में शांति, धर-पकड़ शुरू

सांप्रदायिक हिंसा से प्रभावित आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद में अब धीरे-धीरे शांति लौटने लगी है.

पुलिस का ध्यान अब उन लोगों का पता लगाने और उन्हें पकड़ने पर केंद्रित है, जो हिंसा भड़काने के ज़िम्मेदार हैं.

पुलिस अधिकारियों का कहना है की वे दो ऐसे स्थानीय नेताओं की तलाश कर रहे हैं जिनपर हिंसा में शामिल होने का शक है.

इनमें से एक तेलुगूदेशम का कारपोरेटर राजू सिंह और भारतीय जनता पार्टी का एक कारपोरेटर बैकुण्ठम शामिल हैं.

हैदराबाद के पुराने शहर में चार दिन के बाद गुरुवार को पहली बार कर्फ़्यू में दो घंटे की ढील दी गई लेकिन केवल महिलाओं और बुजुर्गों को ही बाहर आने की अनुमति दी गई ताकि वे ज़रूरी चीज़ें ख़रीद सकें.

शिकायत

हैदराबाद के पुलिस आयुक्त अब्दुल क़य्यूम ख़ान ने कहा कि ढील के दौरान शांति बनी रही.

सब्ज़ी-तरकारी, दूध और दवाएं ख़रीदने के लिए हज़ारों लोग बहार आए लेकिन उन्हें यह शिकायत थी की ज़रूरी वस्तुएँ बहुत ज़्यादा दरों पर बेची गईं.

टमाटर 30 रुपए प्रति किलो और दूध 50 रुपए प्रति लीटर बेचा गया.

गृह मंत्री सबिता इंद्रा रेड्डी ने कहा कि स्थिति से नाजायज़ लाभ उठाने वाले ऐसे चार व्यापारियों को गिरफ़्तार किया गया.

उन्होंने बताया कि ढील के दौरान पुराने शहर में 28 ट्रक सब्ज़ी और 90 हज़ार लीटर दूध उपलब्ध करवाया गया.

दोपहर एक बजे दोबारा कर्फ़्यू लगा दिया गया और अब किसी को बाहर आने नहीं दिया जा रहा है.

ख़ान ने कहा की शुक्रवार को पुराने शहर में कर्फ़्यू में ढील नहीं दी जाएगी. नए शहर के आठ पुलिस स्टेशनों में जहाँ दो दिन से कर्फ़्यू है, स्थिति का आकलन करने के बाद फ़ैसला किया जाएगा.

हिंसा की छान-बीन के विषय में खान ने कहा कि दंगों के ज़िम्मेदारों की पहचान कर ली गई है और उन्हें गिरफ़्तार किया जा रहा है.

अब तक 170 से ज़्यादा व्यक्तियों को गिरफ़्तार किया गया है.

जाँच

पुलिस के विशेष जाँच दल की अब तक की छान-बीन में यह बात सामने आई है कि शनिवार को शुरू होने वाली हिंसा में कुछ बाहर से आने वाले व्यक्तियों का हाथ है.

इनके बारे में संदेह है कि ये कर्नाटक और महाराष्ट्र से संबंध रखते हैं.

साथ ही पुलिस को तेलुगू देशम के नेता राजू सिंह और भाजपा के बैकुण्ठ की तलाश है. पुलिस ने इन दोनों के घरों पर छपा भी मारा लकिन वे फ़रार हो गए.

राजू सिंह इससे पहले वर्ष 2003 में दो ईसाई पादरियों की हत्याओं के मामले में भी प्रमुख अभियुक्त थे.

एक ओर तो पुलिस को उनकी तलाश है, वहीं उन्होंने स्थानीय टीवी चैनलों से कहा है कि पुलिस उन्हें इसलिए निशाना बना रही है क्योंकि उन्होंने हिंदुओं का बचाव किया है.

उन्होंने उल्टा आरोप लगाया कि दंगों के लिए कांग्रेस और मजलिस इत्तेहादुल मुसलमीन ज़िम्मेदार हैं.

बैकुण्ठ पर पुलिस का आरोप है कि वे मंगलवार को बेगम बाज़ार के इलाक़े में बजरंग दल के जुलूस के दौरान हिंसा के लिए ज़िम्मेदार हैं.

इसमें मुसलमानों की दुकानों को लूटा गया था और एक मस्जिद को आग लगाई गई थी.

आरोप

दूसरी ओर भाजपा ने भी आरोप लगाया है कि हिंसा के लिए कांग्रेस और एमईएम ज़िम्मेदार हैं.

Image caption पुलिस दंगे की जाँच कर रही है

लेकिन एमईएम के अध्यक्ष और लोकसभा सदस्य असदुद्दीन ओवैसी ने राज्य सरकार और पुलिस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब दंगाई मुसलमानों की दुकानों और मस्जिदों को चुन-चुन कर निशाना बना रहे थे, तो वो ख़ामोश तमाशा देख रहे थे.

ओवैसी सरकारी दल के साथ फ़्रांस की यात्रा पर थे, लेकिन दंगों के कारण वे यात्रा बीच में छोड़ कर वापस आ गए हैं.

उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि पुलिस ने उल्टा 150 मुसलमान युवाओं को गिरफ़्तार किया है, जिनमें से कुछ की आयु 10-12 वर्ष ही है.

उन्होंने इन दंगों की छान-बीन उच्च अधिकारियों से कराने की मांग की.

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