हैदराबादः जुमे पर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त

हैदराबाद (फ़ाइळ)

अपने अदब और अमन के लिए मशहूर हैदराबाद में सांप्रदायिक हिंसा ने पिछले कुछ दिनों से शहर का माहौल बिगाड़कर रख दिया है.

हिंसा प्रभावित आंध्र प्रदेश की राजधानी में शुक्रवार को सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं.

प्रशासन का कहना है कि शहर में शुक्रवार को भी कर्फ़्यू जारी रहेगा. हालांकि कुछ लोगों को नमाज़ के लिए छूट दी जा सकती है.

पर जुमे की नमाज़ को ध्यान में रखते हुए पूरे शहर में पुलिस की ओर से सुरक्षा के ख़ासे इंतज़ाम किए गए हैं.

इस दौरान पुलिस अभी भी ऐसे लोगों की धरपकड़ और गिरफ़्तारियों में लगी है जिन्होंने पिछले दिनों शहर में दंगों के दौरान क़ानून व्यवस्था का उल्लंघन किया और हिंसा भड़काते रहे.

पुलिस अधिकारियों ने गुरुवार को बताया था कि वे दो ऐसे स्थानीय नेताओं की तलाश कर रहे हैं जिनपर हिंसा में शामिल होने का शक है.

इनमें से एक तेलुगूदेशम के कॉर्पोरेटर राजू सिंह और भारतीय जनता पार्टी के एक कॉर्पोरेटर बैकुण्ठम शामिल हैं.

हैदराबाद के पुराने शहर में चार दिन के बाद गुरुवार को पहली बार कर्फ़्यू में दो घंटे की ढील दी गई लेकिन केवल महिलाओं और बुजुर्गों को ही बाहर आने की अनुमति दी गई ताकि वे ज़रूरी चीज़ें ख़रीद सकें.

जनजीवन प्रभावित

हैदराबाद में सांप्रदायिक हिंसा और उसके बाद लगे कर्फ़्यू की वजह से आम जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है.

यहाँ गुरुवार को दो घंटे के लिए कर्फ़्यू में ढील दी गई थी लेकिन इस दौरान केवल बुज़ुर्गों और महिलाओं को घरों से बाहर आकर खरीदारी की छूट दी गई थी.

हालांकि आम लोगों का कहना है कि बड़े छोटे विक्रेताओं ने इस दौरान मनमाने दामों पर सामान बेचे जिसकी वजह से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा.

सब्ज़ी-तरकारी, दूध और दवाएं ख़रीदने के लिए हज़ारों लोग निकले लेकिन उन्हें यह शिकायत थी कि ज़रूरी वस्तुएँ बहुत ज़्यादा दरों पर बेची गईं.

टमाटर 30 रुपए प्रति किलो और दूध 50 रुपए प्रति लीटर बेचा गया. यहाँ तक कि अंडा 10 से 12 रूपए प्रति की दर से बिका.

दोपहर एक बजे दोबारा कर्फ़्यू लगा दिया गया और उसके बाद किसी को भी बाहर आने नहीं दिया गया.

अब तक 170 से ज़्यादा व्यक्तियों को गिरफ़्तार किया गया है.

जाँच

पुलिस के विशेष जाँच दल की अब तक की छान-बीन में यह बात सामने आई है कि शनिवार को शुरू होने वाली हिंसा में कुछ बाहर से आने वाले व्यक्तियों का हाथ है.

इनके बारे में संदेह है कि ये कर्नाटक और महाराष्ट्र से संबंध रखते हैं.

साथ ही पुलिस को तेलुगू देशम के नेता राजू सिंह और भाजपा के बैकुण्ठम की तलाश है. पुलिस ने इन दोनों के घरों पर छपा भी मारा लकिन वे फ़रार हो गए.

राजू सिंह इससे पहले वर्ष 2003 में दो ईसाई पादरियों की हत्याओं के मामले में भी प्रमुख अभियुक्त थे.

उधर स्थानीय टीवी चैनलों से उन्होंने कहा है कि पुलिस उन्हें इसलिए निशाना बना रही है क्योंकि उन्होंने हिंदुओं का बचाव किया है.

उन्होंने उल्टा आरोप लगाया कि दंगों के लिए कांग्रेस और मजलिस इत्तेहादुल मुसलमीन ज़िम्मेदार हैं.

बैकुण्ठ पर पुलिस का आरोप है कि वे मंगलवार को बेगम बाज़ार के इलाक़े में बजरंग दल के जुलूस के दौरान हिंसा के लिए ज़िम्मेदार हैं.

इसमें मुसलमानों की दुकानों को लूटा गया था और एक मस्जिद को आग लगाई गई थी.

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